उत्तर प्रदेश में बिजली संकट की गूंज सोमवार को संसद में भी सुनाई दी। राज्यसभा में प्रदेश में बिजली संकट के लिए सपा ने केंद्र को दोषी ठहराया। सपा ने कहा कि केंद्र सरकार प्रदेश को निर्धारित कोटे से कम बिजली की आपूर्ति कर रही है, जिसका खामियाजा प्रदेश के लोगों को उठाना पड़ रहा है। सपा ने बिजली आपूर्ति मामले में केंद्र पर यूपी के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया।
राज्यसभा में शून्यकाल में सपा के नरेश अग्रवाल ने प्रदेश में व्याप्त बिजली संकट के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से प्रदेश को कोटे से कम बिजली मिल रही है। प्रदेश को 6000 मेगावाट बिजली की जरूरत है जबकि उसे सिर्फ 4800 मेगावाट बिजली ही दी जा रही है। उन्होंने केंद्र के उस आरोप का भी खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश अपने कोटे से ज्यादा बिजली ग्रिड से खींचता है। जिसके चलते पावर ग्रिड फेल हो जाती है।
अग्रवाल ने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि प्रदेश सरकार का बिजली के मामले में किसी तरह का बकाया है तो उसे बताया जाए। ताकि प्रदेश सरकार उसका भुगतान कर सके। उन्होंने कोल लिंकेज में प्रदेश के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली घरों को पर्याप्त मात्रा में कोयला नहीं मिल रहा है। इसके चलते प्रदेश के पावर प्लांट निर्धारित क्षमता के मुताबिक बिजली का उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। दादरी का पावर प्लांट महज 25 फीसदी बिजली का उत्पादन कर पा रहा है। इसका मुख्य कारण प्लांट को पर्याप्त मात्रा में कोयला न मिलना है।