ऐसा कभी नहीं हुआ होगा कि एक पद के लिए आवेदक को 30 से 35 हजार रुपये का आर्थिक भार उठाना पड़ा हो। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई वर्ष 2011 के 72825 सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों की नियुक्ति प्रक्रिया में यही हुआ है।
मायावती सरकार में पहले अधिकतम पांच जनपदों में आवेदन का विकल्प दिया। 500 प्रति जनपद शुल्क जमा कराया। फिर इसी शुल्क पर प्रदेश के सभी जनपदों में आवेदन की छूट दे दी गई। फिर अखिलेश सरकार में इन्हीं पदों के लिए नए सिरे से आवेदन मांगे। प्रत्येक जनपद के लिए आवेदन का शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया। ऐसे में जनपद वार नियुक्तियां होने की स्थिति में ज्यादातर आवेदकों ने औसतन 40 से 45 जनपदों में आवेदन किए और 20 से 25 हजार रुपये आर्थिक भार उठाया।
कहीं साजिश का हिस्सा तो नहीं...
सोशल मीडिया पर इन नियुक्तियों को लेकर बहस गर्माई है। टीईटी पास बीएड डिग्री धारक प्रदेश सरकार को जमकर आडे़ हाथ ले रहे हैं। उन्हें आशंका है कि कहीं यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा तो नहीं है।
2.5 लाख से ज्यादा आवेदकों के लिए मुसीबत
शास्त्री नगर मथुरा निवासी मीनाक्षी गूर्जर का एटा के आवेदन में नाम गलत है तो सीतापुर में उसकी जन्मतिथि बदल दी गई है। आजमगढ़ निवासी उर्वशी मिश्रा के 24 जनपदों के आवेदनों की अनेक प्रविष्टियां गलत अंकित कर दी हैं। किसी में उसके नाम की स्पेलिंग गलत है तो किसी में पिता का नाम बदल दिया गया है।
एटा में सभी आवेदकों की जन्मतिथि एक समान 15.6.1987 फीड कर दी गई है। ये तो बानगी है। स्थिति इससे भी कहीं ज्यादा खराब है। 72825 सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर 2.5 लाख से ज्यादा आवेदकों के लिए मुसीबत बन गई है।
राज्य स्तर से वेबसाइट पर जारी की गई जनपदवार लिस्ट में अधिकांश आवेदकों के नाम सहित अन्य प्रविष्टियों की फीडिंग गलत कर दी गई है। इससे अब आवेदक उसमें जनपदवार संशोधन के लिए प्रत्यावेदन करते परेशान हैं।
नए निर्देशों ने निकाला दम
10 जुलाई को राज्य स्तर से नया निर्देश जारी करते हुए प्रत्यावेदन में टीईटी 2011 के अनुक्रमांक का कॉलम बढ़ा दिया है, जो आठ जुलाई को जारी निर्देशों में शामिल नहीं था। पहले तो यह भी तय नहीं था कि प्रत्यावेदन आवेदक को खुद जाम करने होंगे या फिर डाक से जाएगे।
कई डाइट ने डाक के प्रत्यावेदन वापस कर दिए। अब स्पष्ट किया गया है कि डाक द्वारा प्रत्यावेदन 15 जुलाई तक भेजे जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में आवेदकों को दो दिन में ही नए सिरे से फिर प्रत्यावेदन भेजने पड़ रहे हैं। इससे डाक घरों पर भीड़ उमड़ रही है।