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'लोक सेवाओं में हिटलरी आत्माएं न हो पाएं दाखिल'

Sat, 22 Dec 2012 11:57 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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‘राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि लोक सेवाओं में हिटलरी आत्माएं न दाखिल हो सकें। नौकरशाही व पुलिस बल को बुनियादी मानवीय मूल्यों से युक्त करने की जरूरत है। पुलिस की तफ्तीश के तौर-तरीकों को भी बदलने की कोशिश की जानी चाहिए, जिससे वे विवेचना के दौरान बुनियादी मानवीय मूल्यों की बलि न दें।’
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह अहम टिप्पणी राहजनी के आरोपी की जमानत मामले में पारित आदेश में की है। जस्टिस सईदुज्जमां सिद्दीकी ने यह आदेश आरोपी बनवारी लाल उर्फ भग्गा पासी के मामले में दिया। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार की तरफ से आरोपी की प्रताड़ना को लेकर उसे 25,050 रुपये बतौर मुआवजा देने की प्रशंसा भी की है।

दरअसल आरोपी को सीतापुर के मछरेहटा थाने की पुलिस ने राहजनी (लूट) के आरोप में 11 दिसंबर 2011 को गिरफ्तार किया था। अभियोजन ने लूट का शिकार बने तीन लोगों से आरोपी की शिनाख्त नहीं कराई थी।
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इस मामले में कोर्ट के आदेश के बाद एसपी सीतापुर ने प्रमुख सचिव गृह से आरोपी को 25,050 रुपये बतौर मुआवजा दिए जाने की सिफारिश की थी। अदालत ने संबंधित अफसर को मानवीय तरीके से कार्य करने की राय देने पर अपर महाधिवक्ता जफरयाब जीलानी की सराहना की है। साथ ही गरीब आदमी को शारीरिक व मानसिक पीड़ा झेलने के एवज में उसे मुआवजा देने संबंधी प्रमुख सचिव गृह व सीतापुर के एसपी के आचरण की भी सराहना की है।

अदालत ने आदेश में कहा कि राज्य सरकार को यह देखना चाहिए कि जब कोई पढ़ाकू युवा किसी पब्लिक ऑफिस या पुलिस विभाग में भर्ती होता है तो वैसे ही वह एक भूत, ड्रैगन बन जाता है। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोक सेवाओं में हिटलरी आत्माएं न दाखिल हो सकें। कोर्ट ने कहा कि सरकार के कामों में पारदर्शिता लाने के मद्देनजर वरिष्ठ नौकरशाहों व वरिष्ठ पुलिसकर्मियों को सतर्कतापूर्वक मानवीय मूल्यों के प्रति लगाव दिखाना चाहिए, जिससे उनके मातहत इसका अनुकरण कर सकें।
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