ठंड बढ़ाने लगी धड़कन, फूल रही सांस
बुलंदशहर। ठंड बढ़ते ही दिल के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या 50 से अधिक तो निजी अस्पतालों में प्रतिदिन 200 से अधिक हो गई है। जिला अस्पताल में इन मरीजों को अस्पताल में बेहतर तरीके से इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। कारण, अस्पताल में कोई हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में मरीजों को हालत गंभीर होने पर रेफर कर दिया जाता है। इन दिनों में सांस और ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 1170 मरीजों ने पंजीकरण कराकर उपचार कराया।
इन दिनों संक्रामक रोगों के मरीज घटे तो दिल की बीमारी व सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल में एक माह पूर्व 20 से 50 मरीज सांस की बीमारी होने पर प्रतिदिन आते थे। अब ऐसे मरीजों की संख्या 50 से 80 तक हो गई है। अधिकांश मरीजों को दिल में दर्द व सांस फूलने की समस्या हो रही है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. परवेंद्र कुमार ने बताया कि ठंड में नसें सिकुड़ने लगती हैं। इसकी वजह से सांस के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। वहीं, ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। इसलिए ठंड में खासकर बुजुर्गों व बीमारी से पीड़ित मरीजों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
निजी अस्पतालों में प्रतिदिन पहुंच रहे 200 से अधिक मरीज
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि इस समय सुबह के समय काफी ठंड पड़ रही है। ऐसे में बुजुर्ग सुबह के समय बाहर निकलने से बचें। आईएमए से जुड़े अस्पतालों में प्रतिदिन हृदय रोग से संबंधित परेशानी को लेकर 200 से अधिक मरीज आ रहे हैं।
ये हैं लक्षण
- एक तरफ के हाथ-पैर काम न करना।
- सांस लेने में परेशानी होना।
- बोलने में लड़खड़ाहट, सिर में तेज दर्द।
- शरीर के एक तरफ के हिस्से में कमजोरी आना।
- आधे चेहरे या एक तरफ के हाथ-पैर में कमजोरी आना।
ये बरतें सावधानी
- सिर हाथ-पैर अच्छी तरह से ढककर ही बाहर निकलें।
- हार्ट और बीपी के मरीज सुबह घर से बाहर न निकलें।
- नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराते रहें।
अस्पताल में पिछले काफी समय से हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी चल रही है। इस संबंध में कई बार शासन से पत्राचार कर नियुक्ति दिलाने की मांग की जा चुकी है। सर्दी के मौसम में हृदय रोग विशेषज्ञ की अधिक आवश्यकता है लेकिन अभी तक तैनाती न होने पर ऐसे मरीजों को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी जा रही है। - डॉ. राजीव प्रसाद, सीएमएस