राज्य सूचना आयुक्त राजकेश्वर सिंह ने बृहस्पतिवार को जिला पंचायत सभागार में सूचना अधिकार अधिनियम से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने आरटीआई के लंबित मामलों की लंबी सूची का जिम्मेदार प्रथम अपीलीय अधिकारी को माना। उन्होंने कहा कि प्रथम अपीलीय अधिकारी संजीदगी से काम करें तो आरटीआई के मामलों को समय रहते निपटाया जा सकता है।
राज्य सूचना आयुक्त राजकेश्वर सिंह ने कहा कि जनपद में आयोग के रिकार्ड के अनुसार 447 आरटीआई प्रकरण लंबित हैं। यूपी में लंबित प्रकरणों की तादाद 54 हजार है। यदि प्रथम अलीपीय अधिकारी जिम्मेदारी से काम करें तो आयोग के पास इतने मामले न पहुंचे। उन्होंने कहा कि 30 दिन के भीतर प्रत्येक आरटीआई का निपटारा करना होता है।
यदि इस अवधी में निपटारा नहीं किया जाता है तो अधिकतम 45 दिन में प्रकरण निपट जाना चाहिए। 15 दिन क्यों बढ़ाए गए इसकी जानकारी आयोग के पास भेजनी होगी। सूचना आयुक्त ने नगर पालिका और नगर पंचातयों के ईओ की खिंचाई की। आरटीआई के तहत किसी भी विभाग की विस्तृत जानकारी नहीं दी जाएगी।
जिस आरटीआई का जवाब दें उसमें प्रथम अपील अधिकारी का नाम, पता और मोबाइल नंबर को उल्लेख कर दें। जन सूचना अधिकारी अपने कार्यालय के बाहर एक बोर्ड लगवा लें। ताकि लोगों को भटकना न पड़े। आरटीआई मांगने वाले की मंशा भांपकर आरटीआई का जवाब दें। जो आरटीआई के जवाब का गलत इस्तेमाल करते हैं उनको आरटीआई का जवाब न दें।
पार्टी पदाधिकारियों को आरटीआई का जवाब न दिया जाए। यदि कोई कोरे कागज पर आरटीआई मांगता है उसे देश का नागरिक मानते हुए आरटीआई का जवाब दे दें। वहीं सूचना आयुक्त ने कहा कि दो माह के भीतर लंबित प्रकरणों को सुलझा लिया जाए अन्यथा दो माह के बाद वह खुद बुलंदशहर में सुनवाई करेंगे। इस दौरान सीडीओ जसजीत कौर, एडीएम प्रशासन, एडीएम वित्त एवं राजस्व, वीसी बीडीए समेत कई अफसर मौजूद रहे।
विभागवार लंबित आरटीआई
डीएसओ 40, बीडीओ जहांगीराबाद 2, बीडीओ अनूपशहर 10, डीआईओएस 02, डीआरडीए 02, डीपीओ दो, प्राचार्य डीएवी पीजी कालेज 06, ईओ बुलंदशहर 03, सचिव कृषि उत्पादन मंडी तीन आदि विभागों में आरटीआई प्रकरण पेंडिंग हैं।
आयोग की मंशा अफसरों को दंडित करना नहीं है। बल्कि आरटीआई का समय से जवाब दिलवाने की है। जो अफसर जानबूझ कर आरटीआई का जवाब नहीं देते उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। जनपद में अब तक 43 अफसरों पर जुर्माना लगाया जा चुका है। राजकेश्वर सिंह, राज्य सूचना आयुक्त