बुलंदशहर। 15 अगस्त 1947 की सुबह भारत के लिए एक निराला दिन था। आजादी की खबर ने हर दिल को खुशी से भर दिया था। स्वतंत्रता दिवस से पहले, जिले के दो स्वतंत्रता सेनानियों मदन लाल गौतम और महावीर सिंह ने सुबह की यादें ताजा कीं। बताया कि लोगों ने रेडियो पर भाषण सुने। मिठाई बांटी और पहली बार शान से तिरंगा लहराया।
खुर्जा के स्वतंत्रता सेनानी महावीर सिंह ने बताया कि 1942 में तिरंगा यात्रा निकालने पर अंग्रेजों ने उन्हें जेल में डाल दिया था। एक साल नौ महीने बाद रिहा होकर वे खुर्जा लौटे थे। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को देश आजाद होने पर सभी ने सुकून की सांस ली। तिरंगा देखकर उनकी आंखें नम हो जाती थीं।
गांव रहमापुर स्यावली निवासी महावीर सिंह 1940 में अंग्रेजों की फौज में भर्ती हुए थे। 1941 में सिंगापुर में तैनाती के दौरान उन्हें अमेरिका के हमले के बाद जेल में डाल दिया गया। वहां उन्हें गांधी ब्रिगेड में शामिल किया गया। म्यांमार में राशन खत्म होने पर उन्होंने पेड़ों के पत्ते खाकर भूख मिटाई थी।
बाबू ब्रिज बिहारी लाल ने समर्पित कर दिया जीवन :
ब्रिज बिहारी लाल (ब्रह्मानंद) का जन्म 1889 में बुलंदशहर में हुआ। एमए, एलएलबी कर अधिवक्ता रहे। 1920 के दशक में कांग्रेस में शामिल होकर असहयोग आंदोलन में भाग लिया। अगस्त 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में गिरफ्तार हुए। तीन माह की कठोर कारावास की सजा मिली, पर पूरा न कर सके और बुलंदशहर जिला कारागार में देहांत हो गया।
स्वतंत्रता सेनानी महावीर सिंह।
स्वतंत्रता सेनानी महावीर सिंह।