फर्म से दो करोड़ की बोगस खरीद, 36 लाख की टैक्स चोरी
बुलंदशहर। गाजियाबाद की एक बोगस फर्म से बोगस खरीद दर्शाकर लाखों की जीएसटीआर लेने से पहले ही वाणिज्य कर विभाग ने कार्रवाई की है। जांच के दौरान दस्तावेजों में कमी पाए जाने पर 10 लाख रुपये मौके पर ही जुर्माना के तौर पर वसूला गया, जबकि जीएसटीआर पर भी रोक लगाई गई है।
सिकंदराबाद क्षेत्र में लोहे की स्क्रैप खरीदकर इंगट बनाने वाली फर्म आफिया स्टील इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के फर्जी खरीद दर्शाने और सरकार को चूना लगाने की शिकायत वाणिज्य कर विभाग को मिल रही थी। वाणिज्य कर विभाग के अफसरों ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पहले तो तथ्यों की जांच की और बाद में फर्म पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि गाजियाबाद की एक फर्म से करीब दो करोड़ रुपये की खरीद की गई है। अफसरों ने जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि फर्म संचालक ने दो करोड़ की खरीद पर 18 फीसदी की दर से 36 लाख रुपये की जीएसटी रिटर्न के लिए आवेदन किया है। इसके बाद खरीदारी के दस्तावेजों पर अफसरों को कुछ शक हुआ तो उन्होंने गाजियाबाद की फर्म की असलियत पता लगाने के लिए वाणिज्य कर विभाग गाजियाबाद के अफसरों को पत्र लिखा। जबकि, दस्तावेजों में कम खरीद और बिक्री दर्शाने और मौके पर अधिक के साक्ष्य मिलने पर 10 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है।
गाजियाबाद की फर्म मिली बोगस तो हुई कार्रवाई
गाजियाबाद के अफसरों ने फर्म की जानकारी देते हुए अवगत कराया कि जिस पते पर फर्म दर्ज दिखाई गई है, वहां पर इससे संबंधित कोई साक्ष्य नहीं हैं। इस जानकारी से साफ हो गया कि केवल जीएसटीआर का लाभ उठाने के लिए कागजों में बोगस फर्म के माध्यम से दो करोड़ की खरीद दर्शाई गई थी। अफसरों ने खरीद के बाद करीब 36 लाख की जीएसटीआर को ब्लैक लिस्ट करते हुए जारी करने पर रोक लगाई है।
दो माह पहले शिकारपुर में की गई थी कार्रवाई
करीब दो माह शिकारपुर स्थित एक फर्म के खिलाफ भी फर्जी खरीद दर्शाने और जीएसटीआर का लाभ लेने के मामले में कार्रवाई की गई थी। उक्त फर्म द्वारा भी स्क्त्रस्ैप में लोहा खरीदकर इंगट बनाने का कार्य किया जाता था। उस कार्रवाई में भी अफसरों ने गाजियाबाद की बोगस फर्म से दो करोड़ की बोगस खरीद कर जीएसटीआर के लाभ लेने पर जीएसटीआर सील की थी।
36 लाख की जीएसटीआर को सीज किया गया है, जबकि मौके पर 10 लाख रुपये जुर्माना भी वसूला गया है। आगे भी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
- धर्मवीर सिंह, ज्वाइंट कमिश्नर, वाणिज्य कर