फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महंगी किताबें खरीदने की मजबूरी

विज्ञापन
विज्ञापन
महंगी किताबें खरीदने की मजबूरी
विज्ञापन

बुलंदशहर। स्कूल और पुस्तक विक्रेताओं ने अभिभावकों की जेब को फिर से काटना शुरू कर दिया है। इस बार भी अधिकतर स्कूलों ने एनसीईआरटी की जगह मनमाने प्रकाशन की किताबें लगाई हैं। एनसीईआरटी का जो कोर्स 950 रुपये में मिल रहा है, वही निजी प्रकाशन से 9500 रुपये का है। इसको लेकर अभिभावकों में निजी स्कूलों के खिलाफ आक्रोश है। शिकायत करने के बाद भी शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाना अनिवार्य है।
प्रत्येक बच्चा पढ़ सके, इसके लिए सरकार ने एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की किताबें लगाने के आदेश दिए थे। इस प्रकाशन की किताबों की कीमत सरकार ने निर्धारित की हुई है। सरकार के सख्त निर्देशों के बाद भी अधिकारी और स्कूल प्रबंधन निजी प्रकाशकों के साथ मिलकर कमीशनखोरी का खेल खेल रहे हैं। हालात यह हैं कि लगातार बढ़ती महंगाई और कोरोना से अभी तक न उबरने वाले लोगों के लिए बच्चों को पढ़ाना मुश्किल होता जा रहा है। एनसीईआरटी की किताबों के सापेक्ष निजी प्रकाशन की किताबों की कीमत सात से आठ गुना तक महंगी हैं। एनसीईआरटी की सभी कक्षाओं की किताब अधिकतम 65 रुपये में बाजार में उपलब्ध हैं, जबकि निजी प्रकाशन की किताबों की कोई कीमत निर्धारित नहीं है। सत्र शुरू होने से पहले ही स्कूल प्रबंधन ने परिजनों को किताब विक्रेताओं के नाम की चिट थमाने की शुरुआत कर दी थी। नगर के यमुनापुरम स्थित सोसायटी के नाम पर संचालित नामचीन स्कूल के एक बड़े पदाधिकारी ने इस बार स्कूल के पास ही फरीदाबाद से अपने मित्र को बुलाकर किताबों का गोरखधंधा शुरू करा दिया। जबकि चांदपुर रोड, नुमाइश रोड, राजे बाबू रोड, शिवपुरी, डीएम रोड, खुर्जा रोड, अनूपशहर रोड स्थित नामचीन स्कूलों ने अंसारी रोड, ईदगाह रोड, यमुनापुरम समेत अन्य स्थानों पर संचालित किताब विक्रेताओं के साथ सेटिंग कर किताबों के नाम पर लूट की शुरुआत कर दी है।
विज्ञापन

खुली किताबों के बजाए किट बनाकर हो रहा वितरण
किताब विक्रेताओं ने लूट के लिए कोर्स के किट बनाकर तैयार कर लिए हैं। इस किट में किताब, कॉपियों के साथ ही स्टेशनरी का सामान भी दिया जा रहा है। नगर के शास्त्री नगर निवासी डॉ. अंकुर शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी कक्षा एक में यमुनापुरम स्थित एक नामचीन स्कूल में पढ़ती है। स्कूल प्रबंधन की ओर से कोर्स के लिए किताब विक्रेता के नाम की जानकारी दी गई। जब मौके पर जाकर स्टेशनरी न लेने की बात कही तो किताब विक्रेता ने कोर्स देने से इनकार कर दिया। साथ ही दो माह बाद खुला कोर्स मिलने की बात कही।
12 में से सिर्फ दो किताबें एनसीईआरटी की
निजी स्कूल संचालकों ने कार्रवाई से बचने के लिए कहीं एक तो कहीं दो किताबें एनसीईआरटी की लगवाई हैं। इसके अलावा अन्य किताबें निजी पब्लिशर्स की लगाई जा रहीं हैं। मोहल्ला मदरसा निवासी रोशी सक्सेना ने बताया कि शिवपुरी स्थित स्कूल की कक्षा चार की 12 किताबों में से केवल रिमझिम और लुकिंग अराउंड नामक किताबें एनसीइआरटी की लगाई गई हैं।
कक्षा एक का कोर्स 4500, नौ का 9500
निजी स्कूलों में इन दिनों कक्षा एक का कोर्स 4500, दो का 4700, तीन का 4857, चार का 5160, पांच का 5300, छह और सात का 5500, आठ का 6320, नौ का 6525 रुपये का दिया जा रहा है। इस कोर्स में कॉपी व किताबों के साथ स्टेशनरी भी जबरन लोगों पर थोपी जा रही है।
विषय प्रकाशन कीमत कक्षा
रेन ड्राप्स निजी 414 चार
एजुकेशनल ग्रामाटिक्स निजी 330 चार
रिमझिम एनसीईआरटी 65 चार
सेव द अर्थ एनवायरमेंटल स्टडीज निजी 324 दो
आर्ट फेस्टीवल निजी 299 दो
जूनियर मैथ निजी 364 पांच
रेन ड्रॉप निजी 429 पांच
आरएसबी 1 निजी 475 एक
जे ए निजी 323 एक
हिंदी व्याकरण निजी 335 छह
साइबर क्वेस्ट निजी 386 छह
एनसीईआरटी की सभी किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। जिसके चलते निजी प्रकाशनों की किताबें लगाई जाती हैं। - डॉ. एचएस वशिष्ठ, प्रधानाचार्य, डीपीएस स्कूल व नोडल अधिकारी सीबीएसई
विज्ञापन

निजी प्रकाशन की किताबें लगाने के मामले में अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि कोई शिकायत मिलती है तो इस संबंध में जांच कराते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। - शिव कुमार ओझा, जिला विद्यालय निरीक्षक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें