फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आठ साल से वर्कशॉप में जमे जेई का नहीं हुआ तबादला

विज्ञापन
विज्ञापन
आठ साल से वर्कशॉप में जमे जेई का नहीं हुआ तबादला
विज्ञापन

बुलंदशहर। बिजली निगम में ट्रांसफार्मर घोटाले के शक की सुई अब वर्कशॉप के एसडीओ व जेई पर घूम रही है। बताया जा रहा है कि वर्कशॉप में तैनात जेई पिछले आठ सालों से वर्कशॉप में है, लेकिन अधिकारी उसका तबादला नहीं कर पाए। ऐसे में अब फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
बिजली निगम में ट्रांसफार्मरों की मरम्मत के नाम पर आठ करोड़ से अधिक का घोटाला सामने आया था। ट्रांसफार्मर फुंकने के मामले में जब जिला प्रदेश में शीर्ष पर पहुंचा तो निगम के चेयरमैन एम देवराज को फर्जीवाड़े का शक हुआ। इसके बाद चीफ इंजीनियर को मामले की जांच के निर्देश दिए। चेयरमैन के निर्देश पर चीफ इंजीनियर ने वर्कशॉप पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की तो पाया कि बड़े स्तर पर रिकॉर्ड में भी फर्जीवाड़ा किया गया था। इसके बाद मामले में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया था। प्रकरण बाहर आया तो अखबारों में सुर्खियां बना। फर्जीवाड़ा लीक होने को लेकर एमडी ने चीफ इंजीनियर से भी सवाल-जबाव किए थे। अब बताया जा रहा है कि आठ करोड़ से अधिक के फर्जीवाड़े को अंजाम देने में वर्कशॉप के एसडीओ और जेई की भूमिका संदिग्ध है। हालांकि समय-समय पर एसडीओ का तबादला किया गया, लेकिन पिछले आठ वर्षों से जेई का तबादला नहीं किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि जेई की मिलीभगत के बिना फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जाना संभव नहीं है। जिसके चलते अब माना जा रहा है कि फर्जीवाड़े में एसडीओ-जेई समेत अन्य के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मामले में एसडीओ और आरोपी जेई ने आरोपों को निराधार बताते हुए जांच में सहयोग की बात कही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रकरण की जांच की जा रही है। कौन अधिकारी कितने समय से एक ही पद पर तैनात है, इसकी भी जांच की जा रही है। जल्द उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। - विनोद कुमार मिश्र, चीफ इंजीनियर, बिजली निगम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें