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साल दर साल छोटा होता गया रावण का ‘कद’

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महिला कारीगर सविता। - फोटो : BULANDSHAHR
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साल दर साल छोटा होता गया रावण का ‘कद’
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बुलंदशहर। शारदीय नवरात्र के शुरूआत से ही जिले भर में कारीगर रावण, मेघनाद आदि के पुतले बनाने में जुटे जाते हैं। अब कोरोना काल और पटाखों पर अंकुश लगने के चलते जहां पुतले की लंबाई घट गई है। वहीं, पुतलों की संख्या में भी कमी आई है। पुतला बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि कारोबार बंदी की कगार पर आ गया है।
नगर में श्रीरामलीला सभा द्वारा आयोजित होने वाली रामलीला में दशहरा के दौरान 80-90 फीट के पुतलों को रंग-बिरंगी रोशनी और आतिशबाजी से बनाया जाता था। वर्ष 2019 में रावण का पुतला 70 फीट का तो कुंभकर्ण व मेघनाद का पुतला 60-60 फीट ऊंचा बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान मात्र रावण के करीब 13 फुट के पुतले का दहन किया गया। वहीं, इस बार 40-40 फुट के रावण, कुभकर्ण और मेघनाद के पुतले का दहन किया जाएगा।
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पांच पीढ़ी के कारोबार को आगे बढ़ा रहीं सविता
नगर के साठा स्थित एक परिवार की पिछली पांच-छह पीढ़ी से पुतला बनाने का कारोबार करता आ रहा है। महिला कारीगर सविता ने बताया कि उनके परिवार में पहले से ही पुतले बनाए जा रहे हैं। दो वर्ष पूर्व एक माह पहले से ही तैयारियां शुरू कर देते थे। अब धीरे-धीरे आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगने और महंगाई होने के कारण पुतला बनाना महंगा हो गया है। इस बार 40 फुट का पुतला तैयार करने में जुटे हुए हैं।
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चार पीढ़ी का कारोबार पड़ने लगा है मंदा : पप्पन
डिबाई तहसील क्षेत्र के दानपुर निवासी पप्पन का परिवार पिछली चार पीढ़ी से पुतला बनाने का कार्य करता आ रहा है। कारीगर पप्पन ने बताया कि बाबा को पुतला बनाते देखकर काम सीखा। अब तक दिल्ली, मथुरा, वृंदावन, अलीगढ़, महाराष्ट औरंगाबाद आदि क्षेत्रों में पुतले बना चुका हूं। पिछले वर्ष कोरोना के चलते काम नाममात्र हुआ तो आतिशबाजी पर बैन लगने के कारण कारोबार मंदा हो गया। इस बार अपने पुत्र हैदर अली, दानिश, भांजा नासिर अहमद, वारिस और मुकेश आदि के संग 21 दिन से पुतला तैयार कर रहा हूं।
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