राइस मिल से राशन का 433 बोरी चावल पकड़ा
बुलंदशहर। अनूपशहर रोड स्थित राइस मिल पर राशन का 433 बोरी चावल पकड़ा है। आपूर्ति विभाग और खाद्य एवं विपणन विभाग की टीम ने मौके से 5.10 लाख की नकदी, चावल से भरा एक कैंटर और शपथपत्र भी बरामद किया है। मिल मालिक समेत छह के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इस मिल पर पहले भी दो बार सरकारी राशन पकड़ा जा चुका है।
आपूर्ति विभाग और खाद्य एवं विपणन विभाग को बृहस्पतिवार रात डीपी राइस मिल पर सरकारी राशन की कालाबाजारी की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस के साथ टीम मिल पर छापा मारने पहुंच गई। टीम को देखकर वहां मौजूद लोग फरार हो गए। यह लोग राशन को पलट रहे थे। मिल में कैंटर नंबर यूपी-13एटी-7817 खड़ा था, जिसमें 259 बोरी चावल भरा हुआ था। निरीक्षण के दौरान मिल में भी 174 चावल की बोरी पाई गई। 51 बोरी खाली मिली, इन सभी बोरियों पर गवर्नमेंट ऑफ पंजाब खरीद वर्ष 2020-21 अंकित मिला। जिससे साफ हो गया कि चावल सरकारी है और इसकी यहां कालाबाजारी की जा रही है।
करीब दो घंटे तक मिल में अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान मिल मालिक या कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। जांच में पता चला कि मिल के मालिक प्रवीण गर्ग और राजेश गर्ग हैं, जो नगर के मोहल्ला कोठियात में रहते हैं। कैंटर का मालिक सलीम गांव चिरचिटा में रहता है। अधिकारियों ने इस बारे में जिलाधिकारी सीपी सिंह को जानकारी दी। डीएम ने मौके पर पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज करवाने के आदेश दिए। पकड़ा गया चावल, कैंटर, राशि आदि दस्तावेज पुलिस को सुपुर्द कर दिए हैं। पूर्ति निरीक्षक सुधांशु यादव की तहरीर पर कोतवाली देहात में मिल मालिक प्रवीण गर्ग और राजीव गर्ग निवासी मोहल्ला कोठियात, प्रेमलता निवासी मोहल्ला कोठियात, सविता गर्ग निवासी नेहरू नगर गाजियाबाद, हेमराज निवासी गांव कमालपुर स्याना और सलीम खां निवासी गांव चिरचिटा थाना सलैमपुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
मिल पर पहले भी दो बार पकड़ा जा चुका है सरकारी राशन
डीपी राइस मिल से पहले भी दो बार सरकारी राशन बरामद किया जा चुका है। उस समय भी कार्रवाई की गई थी, बावजूद एक बार फिर इसी मिल में सरकारी राशन का पकड़ा जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। चर्चा है कि मिल मालिकों के साथ विभागीय अधिकारी और कुछ डीलर भी शामिल हैं। वहीं, यहां पर राशन खरीदने वाले भी पहुंचते हैं।
आखिर कौन बचा रहा मिल मालिकों को
लोगों का कहना है कि कई बार राइस मिल में सरकारी राशन पकड़े जाने के बाद भी मिल मालिकों पर बड़ी कार्रवाई नहीं होती है। रिपोर्ट दर्ज होती है, उसके बाद वह खुलेआम घुमते रहते हैं। लोगों का कहना है कि मिल मालिकों के पीछे प्रशासन या सरकारी के किसी व्यक्ति का हाथ है। तभी वह पूर्व में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सरकारी राशन खरीदते हैं।
नया नहीं है जिले में राशन की कालाबाजारी का मामला
बुलंदशहर। जिले में सरकारी राशन की कालाबाजारी का खेल वर्ष 2016 में फूड सिक्योरिटी योजना के शुरू होते ही शुरू हो गया था।
केंद्र सरकार ने योजना की शुरुआत जरूरतमंद परिवारों के हित में शुरू की थी। पहले दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल मिलता था। कोरोना काल के शुरू होते ही राशन निशुल्क कर दिया। इसके चलते ही यह खेल और जोर पकड़ता गया। इससे पहले भी जिले भर में समय-समय पर राशन की कालाजारी के मामले उजागर होते रहे हैं। जब भी ऐसा कोई मामला सामने आता है तो उस समय अधिकारी कड़ी कार्रवाई की बात करते हैं। लेकिन उसके बाद होता कुछ नहीं। आज तक राशन की कालाबाजारी के मामले में कार्रवाई सिर्फ रिपोर्ट दर्ज करवाने तक ही सीमित रही है।
एक बार में बांटा जा रहा 127.12 मीट्रिक टन राशन
बुलंदशहर। कोरोना काल के बीच निशुल्क राशन वितरण के तहत एक बार में 127.12 मीट्रिक टन राशन का वितरण किया जा रहा है। दिसंबर 2021 में एक बार के राशन का वितरण हो चुका है। जिले में 5.95 लाख राशन कार्ड धारक परिवार हैं। इनसे करीब 25 लाख सदस्य जुड़े हुए हैं। इनके प्रति सदस्य को पांच किलो राशन दिए जाने का प्रावधान है। इसमें दो किलो चावल और तीन किलो गेहूं शामिल रहता है। अफसरों के अनुसार निशुल्क राशन का वितरण मार्च 2022 तक जारी रहेगा। प्रत्येक माह दो बार राशन का वितरण होगा।
जिले के 14 गोदाम से 1352 राशन की दुकान पर होती है सप्लाई
जिले में राशन की दुकानों पर राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी खाद्य एवं विपणन विभाग की होती है। विभाग के जिले में 14 गोदाम हैं, जहां से 1352 राशन की दुकानों पर राशन की सप्लाई की जाती है। दुकानों पर राशन का वितरण पर्यवेक्षक की मौजूदगी में होता है। बावजूद राशन की कैसे कालाबाजारी हो जाती है, यह एक बड़ा सवाल है।
डीलर ऐसे चोरी करते हैं राशन
जिला आपूर्ति विभाग के संरक्षण में राशन डीलर कार्ड धारकों को कम राशन का वितरण करते हैं। इसकी आए दिन शिकायतें होती हैं, लेकिन अधिकारी इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पांच किलो राशन में से डीलर तीन किलो राशन ही देते हैं। यदि उनसे इसका विरोध किया जाता है तो वह महीनों चक्कर लगवाते हैं। परेशानी न हो इस कारण से लोग विरोध भी नहीं करते हैं।
गांव-गांव होती है सरकारी राशन की खरीद
जिले के कुछ गांव में सामने आया है कि राशन डीलर बड़े परिवारों से सेटिंग कर लेते हैं। उन परिवारों में ज्यादा राशन पहुंचता है, उस चावल को वह सस्ते में ही खरीद लेते हैं या बाहरी किसी व्यक्ति को बेच देते हैं। लोगों का कहना है कि जब भी राशन का वितरण होता है तो उस समय गांव-गांव खरीदार पहुंच जाते हैं। वह निशुल्क राशन का 14 रुपये प्रति किलो के दाम देते हैं।
चावल खरीदकर बनाई जाती है कचरी व नमकीन
गांव-गांव से चावल खरीद कर कचरी और नमकीन बनाई जाती हैं। इस तरह के मामले पिछले दिनों भी सामने आ चुके हैं। पिछले वर्ष विभागीय अधिकारियों ने इसका खुलासा किया था। ऐसे में चावल को कम कीमत पर खरीद कर कचरी और नमकीन बनाने वाले काफी मुनाफा कमाते हैं।
बोले विभागीय अधिकारी होगी कार्रवाई
राशन की कालाबाजारी को रोकने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जाएगा। साथ ही चावल की खरीद करने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा। उन डीलरों की पहचान की जाएगी, जो राशन बेचने का काम कर रहे हैं। राशन वितरण में भी पारदर्शिता का सख्ती से पालन होगा। - अभय प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी।
मिल में पकड़ा गया चावल कहां से आया और उसे किसने बेचा। इसकी गहनता से जांच होगी। इसके लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इसकी जांच होने पर जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - जेया-ए-करीम, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी।