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बच्ची के साथ दुष्कर्म और जानलेवा हमले में दोषी को उम्रकैद

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बच्ची के साथ दुष्कर्म और जानलेवा हमले में दोषी को उम्रकैद
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बुलंदशहर। अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट डॉ. पल्लवी अग्रवाल ने 12 वर्षीय बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या की कोशिश किए जाने के मामले में 50 वर्षीय आरोपी छत्तरपाल को दोषी करार दिया है। साथ ही उसे आजीवन कारावास और 1. 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट का यह फैसला सिर्फ आठ महीने के अंदर आया है। वारदात के बाद पीड़िता चलने, फिरने और बोलने में अक्षम हो गई है।
विशेष लोक अभियोजक महेश राघव और भरत कुमार ने बताया कि 15 अक्तूबर 2021 को थाना अहमदगढ़ में पीड़ित पिता ने तहरीर देकर बताया था कि वह अपनी पत्नी के साथ खेत पर गया हुआ था। घर पर उसकी तीनों पुत्रियां मौजूद थीं। उसी दौरान गांव का ही आरोपी छत्तरपाल आया और उनकी 12 वर्षीय बढ़ी पुत्री को उठाकर अंदर कमरे में ले गया। जहां आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। साथ ही शोर मचाने पर आरोपी ने उसके साथ मारपीट करते हुए गला व मुंह दबाकर हत्या की कोशिश की। शोरशराबा होने पर आरोपी छत्तरपाल फरार हो गया। पीड़ित पिता ने बताया कि खेत पर एक बालक ने पहुंच कर उसे मामले की जानकारी दी। जिसके बाद वह घर पहुंचा तो बेटी बेसुध अवस्था में थी। अन्य बेटियों ने मामले की जानकारी उसे दी। पीड़ित पिता अपनी बेसुध हालत में पुत्री को लेकर थाने पहुंचा और आरोपी के खिलाफ शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की।
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जिस पर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। साथ ही पीड़िता को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया गया। हादसे के बाद से पीड़िता के हाथ पैर कम काम कर रहे हैं और वह बोल भी ठीक से नहीं पा रही है। जबकि, वारदात को आठ माह का वक्त बीत चुका है। मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जांच के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट के न्यायालय में हुई। न्यायाधीश ने गवाहों के बयान, साक्ष्यों का अवलोकन और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनकर आरोपी छत्रपाल को दोषी पाया। न्यायाधीश ने अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई है इसके साथ ही अभियुक्त पर 1.25 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अभियुक्त के दुस्साहस की कोई सीमा नहीं
पॉक्सो कोर्ट की विशेष न्यायाधीश डॉ. पल्लवी अग्रवाल ने अपने फैसले में कहा, अभियुक्त के दुस्साहस की कोई सीमा नहीं है। अभियुक्त ने पीड़िता के घर के अंदर ही उसके साथ पाशविकता की है। इस प्रकार पीड़िता अपने घर में भी सुरक्षित नहीं थी। जहां भारत में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है, वहीं बालिकाओं के साथ इस प्रकार की पाशविकता समाज को झकझोरने वाली है। साथ ही कहा कि स्त्री समाज को गढ़ने वाली कुशल वास्तुकार है। लेकिन, इस प्रकार की विकृत मानसिकता वाले व्यक्ति उस वास्तुकार को ही अक्षम बना देते हैं। अभियुक्त के कृत्य से पीड़िता चलने, फिरने और बोलने में अक्षम हो गई है। अपनी बेटी की इस स्थिति को देखकर शायद ही उसके माता-पिता कभी सामान्य जीवन जी सकें।
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ये गवाह हुए पेश
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह के रूप में वादी मुकदमा पीड़िता को पिता, महिला कांस्टेबल दिव्या, पीड़िता की बहन, डॉ. सुधा शर्मा, डॉ. अश्वनी, डॉ. कपिल कुमार मेरठ मेडिकल कॉलेज, प्रारंभिक विवेचक उपनिरीक्षक सुभाष चंद, द्वितीय विवेचक वरिष्ठ उपनिरीक्षक सतीश चंद, अंतिम विवेचक निरीक्षक इंद्रपाल, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विठ्ठल शुक्ला, डॉ. आकांक्षा यादव, प्रधानाध्यापक अजयवीर सिंह, और खुद पीड़िता के बयान दर्ज कराए गए।
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