बुलंदशहर। चंद्रग्रहण के कारण मंगलवार को मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। सूतक काल को ध्यान में रखते हुए भोर 4:30 बजे होने वाली मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। भक्त केवल मंगला आरती के समय ही मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे। चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से प्रारंभ होकर शाम 6:48 बजे समाप्त होगा।
पंडित कैलाश शर्मा ने बताया कि फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर साल का पहला चंद्रग्रहण पड़ेगा। ग्रहण 3:27 घंटे तक प्रभावी रहेगा। चूंकि चंद्रग्रहण भारत में दिखेगा तो इसका सूतक काल भी मान्य होगा। ऐसे में मंदिरों के कपाट बंद रहेंंगे तो वहीं मांगलिक कार्य भी वर्जित रहेंगे।
यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जिसमें आसमान में चांद लाल रंग का नजर आएगा। मंगलवार को सुबह 6:20 बजे से ही सूतक काल शुरू होगा इसके बाद चंद्रग्रहण तक सूतक काल शाम 6:50 बजे रहेगा। उन्होंने बताया कि शास्त्रीय परंपराओं व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में मंदिर के कपाट बंद रखना आवश्यक होता है।
ग्रहण के बाद मंदिर शुद्धिकरण, विशेष पूजन व देवी आराधना संपन्न होगी। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू कर दिए जाएंगे। बताया कि शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण के समय सूतक काल में देवालयों के कपाट बंद रखने की प्राचीन परंपरा है। इस अवधि में वातावरण में विशेष आध्यात्मिक परिवर्तन माना जाता है। इसलिए पूजा-पाठ, अभिषेक और सार्वजनिक दर्शन स्थगित रखे जाते हैं। इसके चलते नगर के राज राजेश्वर मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, साठा देवी मंदिर, भवन मंदिर, हनुमान मंदिर, मनसा देवी मंदिर और गंगेरुआ स्थित श्री द्वाद्वस महालिंगेश्वर सिद्ध महापीठ समेत अहार स्थित अंबकेश्वर मंदिर, शिकारपुर क्षेत्र के बरासऊ स्थित प्राचीन शिव मंदिर, नरौरा के बैलोन स्थित बेला भवानी मंदिर और खुर्जा के नव दुर्गा मंदिर समेत अन्य मंदिरों में पूजा-अर्चना नहीं हो सकेगी।