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Bulandshahar News: मां से दुष्कर्म करने के दोषी बेटे को आजीवन कारावास की सजा

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बुलंदशहर। मां से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने बेटे को दोषी माना है। आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ उस पर 51 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने घटना के एक साल सात महीने बाद ही फैसला सुनाकर मिसाल कायम की है।
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वारदात 16 जनवरी 2023 को हुई थी। पीड़िता के छोटे बेटे ने 22 जनवरी 2023 को मामले में मुकदमा दर्ज कराया था। बताया गया था कि 60 वर्षीय महिला खेत में चारा लेने गई थी। साथ में उसका 38 वर्षीय बड़ा बेटा भी था। वहां पहुंचकर बेटे ने ईख के खेत में घास काटने के बहाने मां को बुलाया। वहां पर मुंह में कपड़ा ठूंसकर दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
इस दौरान महिला बेहोश हो गई थी। आधे घंटे बाद होश आया था आरोपी बेटे ने कहा कि अब वह पति-पत्नी के तौर पर रहेंगे। घटना के बारे में किसी को बताने पर हत्या की धमकी भी दी। वारदात के बाद महिला ने घर आकर पड़ोस में रहने वाली दो महिलाओं को आपबीती बताई। उन महिलाओं ने गुजरात में रह रहे महिला के छोटे बेटे को फोनकर घटना की जानकारी दी।
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इसके बाद छोटा बेटा गुजरात से गांव पहुंचा। 22 जनवरी को आरोपी को पुलिस के हवाले कर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अब त्वरित न्यायालय द्वितीय कोर्ट के न्यायाधीश वरुण मोहित निगम ने आरोपी बेटे को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ में उसे 51 हजार रुपये का अर्थदंड भी दिया है।
तारीख पर रोने लगती थी पीड़िता
सुनवाई के दौरान कोर्ट आने पर पीड़िता बयान दर्ज कराते समय रो पड़ती थी। कराती थी। पीड़िता बार-बार अपने साथ गलत होने की बात कहने की बात कहते हुए रोने लगती थी। पीड़िता ने बताया कि उनके पति की करीब 10 साल पहले मौत हो चुकी थी। आरोपी 38 वर्षीय बेटा अविवाहित था।उसने कई बार उनके साथ दुष्कर्म किया। मेडिकल जांच में भी दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। घर में बंधी बकरी के साथ भी उसने गलत काम किया था।
कोर्ट में बोला खेत मालिक, नहीं थी ईख की फसल
जिस खेत में वारदात हुई थी, उसके मालिक ने कोर्ट में पेश होकर कहा था कि घटना के दिन उसके खेत में ईख की फसल नहीं थी। दिसंबर में ही ईख में आग लग गई थी। इसके बाद उसने गेहूं बो दिया था। कोर्ट ने उससे आग लगने संबंधित शिकायत और साक्ष्य मांगे तो वह नहीं दिखा पाया।


इस प्रकार की वारदात को अंजाम देने वाले लोग ईडीपस कांप्लेक्स के शिकार होते हैं। बचपन में इन्होंने अपनी मां को प्रताड़ित करते हुए देखा होगा। इस तरह के लोग मन की इच्छा और कुंठा को दूर करने के लिए यह तरीका अपनाते हैं। कई बार इस तरह के मनोरोगी अपने पिता की भी हत्या कर देते हैं। कुछ मामलों में संगत के असर से भी इस तरह की वारदात होती हैं। - डा. भूपेंद्र सिंह, मनोवैज्ञानिक
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