अतिक्रमण के साये में काली नदी, बन रहे मकान
बुलंदशहर। कभी शहर के विकास की मुख्य धारा मानी जाने वाली काली नदी की जमीन पर अब मकान बनाए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। हालात यह हैं कि काली नदी को साफ करना तो दूर, उसका अस्तित्व बचाना भी एक चुनौती हो गया है। अब नदी एक नाला बनकर रह गई है। वहीं अधिकारी कागजों में ही इसे सहेजने के दावे किए जा रहे हैं।
मुजफ्फरनगर से शुरू हुई काली नदी बुलंदशहर आते-आते नाले का रूप ले चुकी है। इसका मुख्य कारण है कि भूमाफियाओं ने काली नदी में ही मिट्टी का भराव कराते हुए प्लॉट बेच दिए और अब वहां पर लोगों ने मकान खड़े कर दिए। करीब चार वर्ष पहले एनजीटी ने काली पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने के लिए आदेश जारी किए तो अधिकारी सक्रिय हुए। आनन-फानन में अधिकारियों ने काली नदी के दोनों ओर दो सौ मीटर क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट घोषित कर बोर्ड भी लगवा दिए और किसी भी प्रकार के निर्माण को अवैध बताते हुए निर्माण न करने की चेतावनी दी। हालांकि अधिकारियों की चेतावनी केवल फाइलों तक ही सिमटी रही और काली के किनारे पर भूमाफियाओं ने मिट्टी डलवाकर मकान और दुकानों का निर्माण कराया। इस पर भी अधिकारी मौन रहे।
करीब एक हजार मकान हैं अतिक्रमण की जद में
एनजीटी के आदेश पर काली नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए अधिकारियों ने अतिक्रमण मुक्त करने के लिए योजना तैयार की। हालांकि योजना बनाने के बाद जब मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। अतिक्रमण की जद में करीब एक हजार मकान आए तो उन्हें नोटिस दिया गया। इसके बाद लोगों ने बीडीए दफ्तर में जमकर हंगामा किया और अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रोकनी पड़ी।
विधानसभा में उठाऊंगी मुद्दा : उषा सिरोही
सदर विधायक उषा सिरोही से जब काली नदी क्षेत्र में अतिक्रमण के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि बुधवार से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में अतिक्रमण का मुद्दा उठाया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों की टीम का गठन कराते हुए काली नदी को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा और इसे फिर से लोगों की जीवनधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
काली नदी से अतिक्रमण हटाने के लिए योजना बनाने के निर्देश बीडीए और नगर पालिका अधिकारियों को दिए हैं। जल्द से जल्द अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. प्रशांत कुमार, एडीएम प्रशासन