246 गांवों में जल जीवन मिशन के लिए नहीं मिल पाई जमीन
बुलंदशहर। जल जीवन मिशन योजना के तहत अभी तक केवल 58 गांवों की डीपीआर को ही हरी झंडी मिल सकी है। अधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले के 246 गांवों में अभी तक योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए जमीन नहीं मिल सकी है।
केंद्र सरकार ने गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत गांवों में ट्यूबवेल लगाते हुए पानी की टंकी बनाकर पाइप लाइन के माध्यम से पानी सप्लाई किया जाना था। जिले के 854 गांवों में से अभी तक 264 गांवों में योजना के लिए जमीन ही नहीं मिल पाई है। अधिकारियों के मुताबिक, ट्यूबवेलों के संचालन के लिए सोलर प्लेट लगाई जाएंगी, जिससे बिजली का खर्च करने से मुक्ति मिलेगी। वहीं सरकार भले ही दावा करे कि वर्ष 2023 तक प्रोजेक्ट को पूरा करना है, लेकिन जिले में अभी तक केवल 58 गांवों की डीपीआर को एसडब्ल्यूएस (स्टेट वाटर एंड सेनिटेशन) मिशन से अप्रूवल मिला है, जबकि अधिकारियों ने 120 गांवों की डीपीआर एसडब्ल्यूएस को भेजी है।
विभाग के बंटवारे से प्रोजेक्ट में अड़ंगा
जल निगम को सरकार ने दो हिस्सों में बांट दिया है। इनमें शहर और देहात के हिस्सों को अलग करते हुए अधिकारियों व कामकाज का भी बंटवारा किया जा रहा है, जिससे अधिकारी असमंजस में हैं कि किस अधिकारी को नगरीय क्षेत्र का कार्यभार सौंपा जाएगा और किन्हें देहात क्षेत्र का। वहीं पत्रावलियां और दस्तावेजों के भी हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है।
सरकार ने विभाग को शहर और देहात क्षेत्र में अलग-अलग बांटा है। शहरी क्षेत्र को शहर से तथा देहात क्षेत्र को हापुड़ में तैनात एक्सईएन देखेंगे। अभी तक केवल 58 गांवों की डीपीआर को एसडब्ल्यूएस से हरी झंडी मिली है। जल्द ही अन्य गांवों की डीपीआर बनाकर भेजी जाएगी। 264 गांवों में जमीन की भी तलाश की जा रही है। जल्द जमीन फाइनल करते हुए आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- अनिल कुमार, प्रभारी एक्सईएन, जल निगम