नगर पालिका में एक बार फिर टैक्स फर्जीवाड़ा सामने आया है। पालिका क्षेत्र में करीब एक हजार ऐसे घरों का खुलासा हुआ है, जहां से गृह कर और जल कर वसूला ही नहीं जा रहा है। पालिका के सर्वे में खुलासे के बाद ईओ ने जांच के निर्देश दिए हैं।
नगर पालिका में टैक्स में फर्जीवाड़ा कोई नई बात नहीं है। पालिका कर्मचारी टैक्स लगाने के नाम पर पालिका के खजाने की जगह अपनी जेब भरते हैं। पिछले कुछ सालों में नगर क्षेत्र में करीब डेढ़ गुना मकान बन गए हैं, लेकिन पालिका के आंकड़ों में वृद्धि नहीं हो पाई है।
नगर पालिका अफसरों द्वारा कराए गए सर्वे में यही खेल सामने आ गया है। पालिका द्वारा कराए गए सर्वे में करीब एक हजार ऐसे घर सामने आए हैं, जिन पर अभी तक किसी कारणवश टैक्स नहीं लगा है।
सूत्रों की मानें तो इसमें पालिका कर्मियों का ही खेल है। कर्मचारी जानबूझकर नए बने मकानों और दुकानों पर टैक्स नहीं लगाते हैं। टैक्स छोड़ने की एवज में गृह स्वामी से महीना बांध लिया जाता है। इसका सीधा-सीधा नुकसान नगर पालिका के खजाने को होता है।