सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद कुर्सी बचाने में जिला पंचायत अध्यक्ष हरेंद्र यादव घिर गए हैं। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की रिट को बृहस्पतिवार दोपहर वापस ले लिया है।
आरोप है कि रिट के साथ सदस्यों के फर्जी शपथ पत्र दाखिल किए गए थे। उनके खिलाफ आधे से ज्यादा सदस्यों ने डीएम को अविश्वास प्रस्ताव पत्र सौंपा था। जिस पर डीएम ने सुनवाई के लिए एक मई की तारीख नियत की है।
भाजपा सरकार आने के बाद से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी खतरे में दिखाई दे रही है। भाजपा नहीं चाहती कि सपा कोटे से चुने गए हरेंद्र यादव अब कुर्सी पर रहें। इसलिए उन्होंने मोर्चाबंदी शुरू कर दी है।
आधे से अधिक सदस्यों ने छह अप्रैल को डीएम को अविश्वास प्रस्ताव का पत्र सौंपा था। डीएम ने अविश्वास प्रस्ताव पर सुनवाई के लिए एक मई नियत कर रखी है। अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ हरेंद्र यादव ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी थी।
इस बीच बृहस्पतिवार दोपहर एकाएक हाईकोर्ट से रिट वापस ले ली। बताया गया है कि अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ रिट दायर करते समय लगाए गए कुछ शपथ पत्र फर्जी थे।
उनकी अगुवाई कर रहे सुनील चरौरा का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष हरेंद्र यादव ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए ऐसा किया है। आठ में से पांच लोग अपने शपथ पत्र लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गए।
हाईकोर्ट में मौजूद जिला पंचायत सदस्य सुनील चरौरा ने फोन पर बताया कि अध्यक्ष हरेंद्र यादव ने एक बैठक के लिए अपने पत्र पर योगेंद्र तोमर को चेयरमैन बना दिया था। इसमें हरेंद्र यादव धोखाधड़ी के मामले में फंस रहे थे। इसलिए उन्होंने रिट वापस ले ली।