बुलंदशहर। हापुड़ में अधिवक्ताओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में अधिवक्ताओं की हड़ताल सात दिन और बढ़ गई है। अब रविवार तक कोर्ट में न्यायिक कार्य नही होंगे। शनिवार देर शाम हड़ताल समाप्त होने की घोषणा के बाद वादकारियों ने राहत की सांस ली थी लेकिन, रविवार देर शाम यूपी बार काउंसिल और केंद्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर हड़ताल को फिर से बढ़ा दिया गया है। यूपी बार काउंसिल ने 2 दिन और संघर्ष समिति ने 5 दिन के लिए हड़ताल बढ़ाई है। सोमवार को अधिवक्ता जिलेभर में न्यायिक कार्य से विरत रहे। नगर में डीएम, और सभी तहसील स्तर पर अधिवक्ताओं ने एसडीएम को ज्ञापन दिए। हड़ताल का असर जेल में भी दिख रहा है।
29 अगस्त को हापुड़ में तहसील चौपला पर प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करने से बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष समेत कई अधिवक्ता घायल हो गए थे। घटना के बाद नाराज अधिवक्ताओं ने पूरे प्रदेश में न्यायिक कार्य का बहिष्कार शुरू कर दिया। तभी से प्रदेशभर के अधिवक्ता न्यायिक कार्यों का बहिष्कार कर रहे हैं। करीब 10 दिन की हड़ताल के बाद गत शनिवार को यूपी बार काउंसिल ने वर्चुअल बैठक करने के बाद हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी थी। रविवार देश शाम फिर से हड़ताल जारी रखने की घोषणा कर दी गई। सोमवार को भी बुलंदशहर में मुख्यालय पर अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष यतेंद्र पाल सिंह तोमर एवं महासचिव उमेश कौशिक और सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बिशन कुमार एवं महासचिव देवेंद्र कुमार शर्मा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन दिया। ज्ञापन में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने, उन्हें जेल भेजने और घायल अधिवक्ताओं को मुआवजा देने की मांग की।
जमानत नहीं होने से जेल में बढ़ रही कैदियों की संख्या
अधिवक्ताओं की हड़ताल का असर जिला कारागार में भी नजर आ रहा है। क्योंकि प्रतिदिन पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल तो भेज रही है, लेकिन अधिवक्ताओं की हड़ताल होने के चलते जिन अपराधों में आरोपियों को जल्दी जमानत मिल जानी चाहिए थी, उनको भी जमानत नहीं मिल पा रही है। इससे दिन प्रतिदिन जेल में अपराधियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। बता दें कि जिला कारागार की क्षमता 960 बंदी-कैदी रखने की है लेकिन, वर्तमान में यह संख्या करीब 2600 पहुंच चुकी है। जिसमें बंदियों की संख्या 2100 और कैदियों की संख्या करीब 500 बताई जा रही है। बीते 10-12 दिनों के अंदर ही जिला कारागार में करीब नए 120 बंदी पहुंचे हैं लेकिन, उनके मुकाबले जमानत पर कम लोग ही बाहर आ पाए हैं।