फर्जी मुठभेड़ मामले में पुलिस को चकमा देकर रिटायर्ड सीओ ने किया सरेंडर
बुलंदशहर। सिकंदराबाद थाना क्षेत्र में वर्ष 2002 में हुए फर्जी मुठभेड़ के मामले में फरार चल रहे 25 हजार के इनामी रिटायर्ड सीओ रणधीर सिंह ने बुधवार को सुबह 11 बजे सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वहीं, एक दिन पहले एसएसपी ने फरार चल रहे रिटायर्ड सीओ पर 25 हजार का इनाम घोषित किया था। जिसके बाद आरोपी ने पुलिस को चकमा देते हुए सरेंडर कर दिया। न्यायालय ने आरोपी को जेल भेज दिया है। मामले में अब तक सभी आठ पुलिस कर्मियों को जेल भेजा जा चुका है, जिसमें से चार जमानत पर हैं।
वर्ष 2005 में सीजेएम कोर्ट ने आरोपी रिटायर्ड सीओ समेत आठों पुलिस कर्मियों को तलब किया था। इसके बाद कई बार समन भेजा गया, लेकिन रणधीर सिंह कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट से मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किया। आरोपी पुलिसकर्मी एसआई संजीव कुमार ने 20 सितंबर 2021 को कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। 22 सितंबर को आरोपी मनोज कुमार और 24 सितंबर को आरोपी जितेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि सतेंद्र, तोताराम, रघुराज और जीप चालक श्रीपाल ने कोर्ट के समक्ष पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया था। बाद में उन्हें जमानत भी मिल गई थी। कोर्ट से कई बार उसके गाजियाबाद स्थित वर्तमान और आगरा स्थित मूल आवास पर नोटिस भेजा गया था।
यह था मामला
तीन अगस्त 2002 को सिकंदराबाद कोतवाली में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक रणधीर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि बुलंदशहर कोतवाली देहात सीमा से टीम के साथ गश्त करते हुए सिकंदराबाद की तरफ लौट रहे थे। गांव आढ़ा मोड़ के निकट बिलसूरी की तरफ से फायरिंग की आवाज सुनाई दी। वह हमराह पुलिसकर्मी कांस्टेबल जितेंद्र सिंह, मनोज, जीप चालक श्रीपाल, संजीव कुमार, सतेंद्र, तोताराम एवं रघुराज के साथ मौके पर पहुंचे, वहां पर एक रोडवेज बस से उतरकर तीन बदमाश भागते हुए दिखाई दिए। पुलिस टीम के रोकने पर बदमाशों ने फायरिंग की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश की गोली लगने से मौत हो गई। मृतक की पहचान प्रदीप कुमार पुत्र यशपाल सिंह निवासी गांव सहपानी थाना सिकंदराबाद के रूप में हुई। सिकंदराबाद पुलिस द्वारा जिस युवक को लुटेरा बताया गया था वह युवक बीटेक का छात्र निकला था। पीड़ित परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया तो पुलिस ने मृतक के पिता समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत अन्य कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद पीड़ित परिजनों ने मामले में कोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट से मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किया गया।
कोर्ट के सख्ती के बाद किया सरेंडर : यशपाल सिंह
फर्जी मुठभेड़ में मारे गए बीटेक के छात्र प्रदीप के पिता ने फरार रिटायर्ड सीओ रणधीर सिंह के सरेंडर को लेकर कहा कि पुलिस हमेशा से आरोपियों के सहयोगी की भूमिका में रही। यदि पुलिस ने कोर्ट के आदेशों का अनुपालन किया होता तो आरोपियों की गिरफ्तारी बहुत पहले हो गई होती। सुप्रीम कोर्ट के मामले में सख्ती दिखाने और राज्य सरकार पर मामले में कार्रवाई नहीं करने पर सात लाख का जुर्माना लगाने के बाद ही रिटायर्ड सीओ ने कोर्ट में सरेंडर किया। वर्ष 2018 में सीजेएम कोर्ट बुलंदशहर ने सीओ रणधीर सिंह की सैलरी रोकने के आदेश कर दिए थे। मगर कोर्ट के आदेश के बाद भी उन्हें वेतन मिलता रहा और विभाग ने उनका सहयोग किया।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांगी सुरक्षा
यशपाल सिंह ने कहा कि बेटे को न्याय दिलाने के लिए केस की पैरवी के दौरान उन्हें केस वापस लेने के लिए कई बार धमकी भी मिली। धमकियों को लेकर वह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अपनी व परिवार की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, जिलाधिकारी, एसएसपी को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की है।
कई जनपदों की खाक छानती रही पुलिस, मगर पकड़ न सकी
मामले में फरार आरोपी सीओ की तलाश में पुलिस कई जिलों की खाक छानती रही मगर गिरफ्तार नहीं कर सकी। कोर्ट के दबाव के चलते उन्होंने स्वयं ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सिकंदराबाद कोतवाली प्रभारी जयकरण सिंह ने बताया कि फरार सीओ की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने आगरा, झांसी, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली, मेरठ समेत कई जनपदों में दबिश दी थी।