जवाहर बाग में कथित सत्याग्रहियों पर फायरिंग करने वाले पुलिस कर्मी नहीं थे। यह दावा चश्मदीद बताने वाले अनूपशहर निवासी चेतराम सैनी का है। चेतराम आज सूरजपुर में नरपत सैनी के घर शोक में शामिल होने आया था। मथुरा बवाल में घायल नरपत की पिछले दिनों मौत हो गई थी।
नरपत सैनी के घर आए चेतराम सैनी का दावा हैे कि दो जून की शाम जवाहर बाग गेट पर पुलिस और पीएसी तैनात थी। बार-बार हमसे जवाहर बाग खाली करने को कहा जा रहा था। रामवृक्ष चुपचाप खड़ा था और हम लोग बैठे थे। उस जगह से करीब 100 मीटर दूर अचानक जेल की दीवार तोड़कर कथित रुप से खाकी वर्दी पहने कुछ लोग हम पर टूट पड़े।
कुछ पंडालों में आग लगा दी और फायरिंग करने लगे। उसका दावा है कि जवाहर बाग में हमला करने वाले पुलिस-पीएसी के जवान नहीं थे। दीवार तोड़कर अंदर घुसे पुलिस की वर्दी में बवाली थे। भगदड़ के बीच रामवृक्ष यादव को अंतिम बार मैंने खुद जिंदा देखा था। उसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला।
बवाल में 17 लोग मारे जा चुके थे। सभी लाशें मुख्य कार्यालय पंडाल नंबर 15 में एकत्रित कर ली गई थीं। अचानक फिर इन्हीं वर्दीधारियों ने पंडाल में एक गोला दागा और सारी लाशें जलकर राख हो गईं।
चेतराम के मुताबिक पूरे जवाहर बाग में करीब पांच हजार लोग थे। ज्यादातर इस उपद्रव का शिकार हुए हैं। चेतराम ने वहां से भागकर जान बचाई। आगरा के अस्पताल में कई दिन तक इलाज चला, जिसके बाद वह अपने घर आ पाया है।
चेतराम का दावा है कि हमारे पास हथियारों के नाम पर केवल रामवृक्ष यादव की रायफल थी। पुलिस से बचने के लिए हमने पत्थर जरूर जमा कर लिए थे। पुलिस पर पथराव भी किया था। उसका दावा है कि पुलिस ने एक स्थान से ही हथियारों का जखीरा बरामद करना दिखाया है जो सही नहीं है।