मथुरा के जवाहर बाग में कथित सत्याग्रहियों के खिलाफ चले ऑपरेशन में औरंगाबाद के गांव सूरजपुर टीकरी निवासी नरपत भी घायल हुआ था। पुलिस ने उसको आगरा में भर्ती कराया था। सूचना मिलने पर परिजन उसको गाजियाबाद के एमएमजी जिला अस्पताल लेकर आ गए थे। कई दिन चले उपचार के बाद उसने एमएमजी हॉस्पिटल में आठ जून को दम तोड़ दिया।
परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया है। यहां का एक व्यक्ति अभी लापता है। वहीं एक अन्य व्यक्ति खुद को पुलिस आपरेशन का चश्मदीद होने का दावा कर रहा है।
क्षेत्र के सूरजपुर टीकरी गांव निवासी नरपत सैनी पुत्र नौवत सिंह अपने पड़ोसी गंगासरन पुत्र मुखत्यार सैनी के साथ मथुरा के जवाहर बाग में रामवृक्ष यादव की अगुवाई में चल रहे ‘सत्याग्रह’ में शामिल होने के लिए 25 मई को गए थे।
नरपत के पुत्र रमेश सैनी ने बताया कि वहां दो जून को हुई हिंसा में पुलिस कार्रवाई के दौरान पिता नरपत सैनी (80) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने उन्हें आगरा के एक अस्पताल में भर्ती कराया था। मौका पाकर नरपत सिंह ने परिजनों को घटना की सूचना दे दी थी। जानकारी पाकर घायल के परिजन आगरा पहुंचे।
चिकित्सकाें ने घायल को डिस्चार्ज करने से इंकार कर दिया। बाद में परिजन पुलिस के आला अफसरों से गुहार लगाकर घायल नरपत को अपने साथ ले आए। छह जून को उसको गाजियाबाद के एमएमजी जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया।
तीन दिन के उपचार के बाद आठ जून को नरपत की मौत हो गई। परिजन गाजियाबाद में पीएम कराकर नौ जून को उसका शव गांव ले आए और अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक के पुत्र रमेश सैनी ने बताया कि सुभाषचंद्र बोस और जय गुरुदेव से लगाव के चलते वे काफी समय से ‘सत्याग्रह ’ स्थल पर आते-जाते रहते थे। जवाहर बाग से करीब एक सप्ताह पूर्व ही वे आंदोलन में शामिल होने गए थे।