बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को लेकर बेशक कितने अभियान चल रहे हों। कितनी जागरूकता फैलाई जा रही हो, लेकिन अब भी बेटी का अभिशाप मानने वालों की इस समाज में कोई कमी नहीं है।
ऐसा ही एक मामला सिकंदराबाद में सामने आया है। यहां हैवान बने एक बाप ने पांच बच्चियों के बाद छठी बेटी पैदा होने पर उसे आग में फेंक दिया। डेढ़ माह की बेटी को आग की लपटों में घिरा देख मां ने शोर मचा दिया।
स्थानीय लोगों ने बेटी को बचाया और निजी अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस तहरीर मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई की बात कह रही है।
मोहल्ला झारखंडी निवासी एक रिक्शा चालक के करीब डेढ़ माह पूर्व छठी बेटी हुई। लगातार छठी बेटी होने से रिक्शा चालक आए दिन पत्नी से मारपीट करता था।
बताया गया कि सोमवार शाम को आरोपी पिता नशे की हालत में आया और छठी बेटी होने पर पत्नी के साथ मारपीट करने लगा। बताया गया कि वहीं लकड़ी जल रही थीं।
हैवान बने इस बाप ने डेढ़ माह की बेटी को आग में फेंक दिया। बेटी को आग में फेंकने पर बदहवास हुई मां ने शोर मचा दिया। शोर सुनकर पड़ोसी एकत्र हो गए और बेटी को आग से उठा लिया।
इसी दौरान किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम पर फोन कर जानकारी दी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी पिता वहां से भाग गया। पड़ोसियों ने बेटी को घायल अवस्था में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
बताया गया कि बेटी की हालत अब खतरे से बाहर है। वहीं पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी है। हालांकि पुलिस के पास अभी मामले की तहरीर नहीं आई है। लेकिन पुलिस कंट्रोल रूम में दर्ज सूचना के आधार पर ही पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है।
इतनी बेटियों को कैसे पाले
पुलिस की जांच में पता चला कि आरोपी पिता पत्नी से इस बात पर लड़ता था कि इतनी बेटियों की आखिर वह कैसे देखभाल करे। इसको लेकर ही वह आए दिन अपनी पत्नी को पीटता था। सोमवार को पिता ने हैवानियत की सभी हदें पार कर दीं।
सामाजिक बहिष्कार हो
एनआरईसी कॉलेज के समाजशास्त्री डॉ. ओपी सिंह का कहना है कि बेटियों को पैदा करने वाले ही इन्हें खत्म करने का दुस्साहस करते हैं, जो बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं है। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।
समाज को चिढ़ाती ये घटनाएं
नवदीप चाइल्डलाइन के सचिन एन वर्मा ने बताया कि ऐसी घटनाएं समाज को आइना दिखाती हैं। जब तक समाज में बेटियों के प्रति जागरूकता नहीं आएगी, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।