दुष्कर्म के प्रयास से आहत महिला के मिट्टी का तेल छिड़ककर आत्महत्या करने के मामले में कोर्ट ने देवर को दोषी मानते हुए चार साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट ने दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
यह निर्णय अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या प्रथम मोहन लाल विश्वकर्मा के न्यायालय ने दिया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी पूनम यादव ने बताया कि शिकारपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी विधवा ने आठ सितंबर 2011 को थाना शिकारपुर में एफआईआर दर्ज कराई थी।
जिसमें कहा था कि उसने अपनी बेटी का विवाह 2010 में प्रेम कुमार के साथ किया था। उसके ससुराल वाले अतिरिक्त दहेज के रूप में 50 हजार रुपये व बाइक की मांग करते थे। मांग पूरी न होने पर मानसिक व शारीरिक यातनाएं देते थे।
आठ सितंबर 2011 की शाम पति प्रेमकुमार, ससुर जसवंत व सास कुंती, ननद प्रियंका व देवर जितेंद्र, जेठ लाखन व जेठानी सपना ने बेटी के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी थी। जिससे उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद सास कुंती देवी, जितेंद्र कुमार व जसवंत कुमार के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी।
कोर्ट ने कुंती देवी, जसवंत कुमार को साक्ष्य का लाभ देते हुए बरी कर दिया। जबकि मृतका के बयानों के आधार पर देवर को बलात्कार के प्रयास व आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के आरोप में चार साल की सजा व दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। कोर्ट के आदेश पर देवर जितेंद्र को जेल भेज दिया गया।