बुखार से मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिलेभर में बुखार अपने पैर पसार चुका है। अहार क्षेत्र के गांव खनौदा और औरंगाबाद में बुखार से तीन लोगों की मौत के बाद ग्रामीण खौफजदा हो गए हैं। इसके साथ ही जिले में बुखार से मरने वालों की संख्या अब 42 हो गई है।
बृहस्पतिवार को अहार थाना क्षेत्र के गांव खनौदा निवासी कुंवरपाल शर्मा पुत्र हरिशंकर और ओमेन्द्र पुत्र नत्थू की बुखार से मौत हो गई। कुंवरपाल के परिजनों ने बताया कि उसे पिछले एक सप्ताह से बुखार था। कुंवरपाल का इलाज पास के ही अपंजीकृत चिकित्सक द्वारा किया जा रहा था।
बृहस्पतिवार को तबीयत अधिक खराब होने पर उसे बुलंदशहर ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इसके अलावा गांव निवासी ओमेन्द्र का इलाज भी एक अपंजीकृत चिकित्सक के यहां चल रहा था। उसकी तबीयत भी बृहस्पतिवार को अधिक खराब हो गई और उसने दम तोड़ दिया।
ग्राम प्रधान ने बताया कि गांव में सैकड़ों लोग बुखार की चपेट में हैं। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में कोई कैम्प नहीं लगाया है। दूसरी ओर बुगरासी क्षेत्र के गांव गेसूपुर निवासी तुलसी पुत्र खाकरी को बीते पांच-छह दिनों से बुखार था। उसका उपचार बुगरासी के एक अपंजीकृत चिकित्सक से कराया जा रहा था। बृहस्पतिवार को तुलसी की हालत और खराब हो गई। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
मरीजों की जेब पर भारी बुखार का कहर
बुखार से तप रहे मरीजों की जेबों पर भी काफी बोझ पड़ रहा है। प्राइवेट अस्पतालों में बुखार से पीड़ित मरीजों को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के नाम पर जमकर लूटा जा रहा है। प्राइवेट अस्पतालों में बुखार के सामान्य मरीजों को खून जांच, दवाइयों के नाम पर जमकर लूटा जा रहा है। मरीजों को पांच से 10 हजार के बिल थमाए जा रहा है। बुखार के बाद मरीज पैसों से भी पिट रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस बाबत कोई सुध नहीं ले रहा है।
हर बुखार नहीं होता डेंगू-चिकनगुनिया
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एके गर्ग ने बताया कि हर बुखार डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया नहीं होता है। चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया और सामान्य वायरल के लक्षणों में मामूली अंतर होता है। डेंगू में हल्के बुखार के साथ थकावट और लाल चकते होते हैं। आंखों के ऊपरी हिस्से में दर्द और खिंचाव होता है।
चिकनगुनिया में बुखार का असर कम और जोड़ों में दर्द ज्यादा होता है। इसके अलावा मलेरिया में रुक-रुककर बुखार आता है। शाम के समय बुखार तेज हो जाता है। डॉ. एसके गर्ग ने बताया कि बुखार के पहले दिन पैरासीटामॉल ही लें। खाने में अधिक से अधिक तरल पदार्थ लें।
कैंप लगाकर मरीजों का किया उपचार
औरंगाबाद । क्षेत्र के गांव बालका में बृहस्पतिवार को विकास युवा सेवा समिति के तत्वाधान में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कैंप लगाया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच कर उपचार किया। इस मौके पर सुनील त्यागी, मोहम्मद सलीम, आलोक कुमार, चंद्रप्रकाश, रमाकांत शर्मा, सकीजान कुरैशी, शमशाद खां, मंटू त्यागी, किशन त्यागी आदि मौजूद रहे।
दोनों मौतों की जानकारी उन्हें नहीं है। गांव में टीम भेजकर दोनों मौतों का कारण जाना जा रहा है। गांव में मेडिकल कैम्प लगाया जाएगा।
डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ