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Bulandshahar News: बुलंदशहर 244 और खुर्जा का 273 पहुंचा एक्यूआई, नहीं लागू हुई पहली स्टेज

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बुलंदशहर। सर्दी के बढ़ते ही जिले में धीरे-धीरे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) भी बढ़ने लगा है। लेकिन जिले में अभी तक प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए कोई पहल शुरू नहीं हुई है। तीन दिन पूर्व बुलंदशहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 के आसपास चल रहा था। मंगलवार-बुधवार को दो सौ के पार पहुंच गया। वहीं, अब सड़कों पर धूल उड़ने से वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ने पर न तो छिड़काव कराया जा रहा है और न ही अभी ग्रेप (ग्रेडेट रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू किया गया है। यदि अभी हालात पर काबू नहीं पाया गया तो आने वाले दिनों में लोगों को स्वच्छ हवा लेने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
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मौसम में हुए बदलाव के कारण पिछले कई दिनों से शहर और आसपास के क्षेत्रों में हवा का स्तर खराब होता जा रहा है। पिछले दो दिन से धीरे-धीरे जिले की वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ती जा रही है। फिलहाल अभी जिले की वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के पार चल रही है। जो आने वाले दिनों में 300 से 400 के पार पहुंचने की संभावना है। इससे बचने के लिए सीपीसीबी द्वारा एक अक्तूबर से ग्रेप सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए गए। लेकिन अभी विभागों द्वारा कोई पहल शुरू नहीं की गई है। इससे आने वाले दिनों में राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। बुधवार को शहर के अधिकांश मार्गों पर धूल उड़ती हुई नजर आई तो वहीं, निर्माण कार्य खुले में किया जा रहा है और निर्माण कार्य की सामग्री भी खुले में रखी हुई है। साथ ही पुराने वाहनों पर भी सख्ती नहीं की गई है। सड़कों पर उड़ती धूल, खुले में पड़ी निर्माण सामग्री और शहर के प्रमुख चौराहों पर अक्सर लगने वाले जाम के कारण जिले की हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 व कार्बनिक तत्व के कण आसानी से घुल रहे हैं। बुधवार को सीपीसीबी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार हवा की गुणवत्ता का सूचकांक बुलंदशहर का 211 तो खुर्जा को 265 मापा गया।

ग्रेप लागू करने में जिला रहता है विफल

जिले का एक्यूआई 200 के पार पहुंचने पर ग्रेडेट रिस्पांस एक्शन प्लान सिस्टम लागू करने के निर्देश हैं। लेकिन अक्सर जिले में ग्रेप सिस्टम पूरी तरह से लागू नहीं किया जाता। इसके कारण जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ता रहता है। प्रदूषण अफसरों का कहना है कि ग्रेप सिस्टम में निकाय, बीकेडीए, सिचांई विभाग, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, परिवहन निगम, परिवहन विभाग, बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग, औद्योगिक इकाइयों की भी जिम्मेदारी होती है।
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एक्यूआई का स्तर

बता दें कि 0-50 के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को अच्छी श्रेणी का माना जाता है। वहीं 51-100 तक को संतोषजनक, 101 से 200 तक (माडरेट) औसतन, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब, 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी में आता है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक को बढ़ने से रोकने के लिए ग्रेप सिस्टम लागू किया जा चुका हैं। पराली जलाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। जिले की सभी निकाय अफसरों को छिड़काव कराने के निर्देश दिए हैं। मौसम में हुए बदलाव से एक्यूआई में बढ़ोतरी हो रही है। - विवेक कुमार मिश्र, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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