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बिजली निगम के एक्सईएन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

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बिजली निगम के एक्सईएन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
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बुलंदशहर। फर्जी बिल जारी कर संशोधन करने और बिल जमा करने के बाद भी धनराशि वापस न करने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने बिजली निगम के एक्सईएन के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। इसके साथ ही पूर्व में जारी वारंट की तामील कराने में लापरवाही बरतने पर नगर कोतवाली प्रभारी को भी दो जून तक पेश होने के आदेश दिए हैं।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह ने बताया कि यमुनापुरम कॉलोनी निवासी एडवोकेट विजय सिंह ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि जुलाई 2017 का बिजली बिल उसने जमा कर दिया था। इसके बाद अगस्त 2017 में बिजली निगम ने 42885 रुपये का बिल बनाकर भेज दिया। इसमें 40887 रुपये का पुराना बकाया बिल दर्शाया था, साथ ही बकाया बिल दर्शाते हुए अवैध रूप से कनेक्शन काट दिया। जब इसकी शिकायत बिजली निगम के एक्सईएन को दी गई तो एक्सईएन ने पिछले बकाया बिल की राशि में से 28485 रुपये का भुगतान न होने तक कनेक्शन न जोड़ने की बात कही। कनेक्शन जुड़वाने के लिए 28485 रुपये विभाग के खाते में जमा करा दिए थे। इसके बाद अगले माह के बिल में फिर से बिजली निगम की ओर से 3773 रुपये जमा कराए गए, जबकि वास्तविक बिल मात्र 1841 रुपये का था। जब आरोपी ने अधिकारियों से अतिरिक्त दी गई धनराशि को वापस करने की मांग की तो उन्होंने पहले तो आश्वासन दिया, लेकिन बाद में धनराशि जारी करने से इनकार कर दिया। जिसके चलते उपभोक्ता ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष विजय कुमार ने मामले में सुनवाई करते हुए आदेश दिए थे कि अतिरिक्त लिए गए 28485 रुपये का 45 दिन के अंदर मय ब्याज भुगतान किया जाए। इसके बाद भी बिजली निगम के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके बाद उपभोक्ता आयोग ने एक्सईएन के खिलाफ वारंट जारी किए थे।
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पुलिस ने तामील नहीं कराए वारंट, न एक्सईएन हुए पेश
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष के निर्देश पर एसएसपी ने वारंट तामील कराने के आदेश दिए थे, लेकिन नगर कोतवाली पुलिस ने गैर जमानती वारंट को तामील नहीं कराया। जिसके चलते अब मामले में एक्सईएन के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं। साथ ही नगर कोतवाली प्रभारी को भी आदेशों का पालन न करने और कोर्ट में हाजिर न होने पर दो जून को कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।
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बार-बार आदेशों के बाद भी हाजिर नहीं हुए थे विपक्षी
उपभोक्ता की शिकायत के बाद बिजली निगम के अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के आदेश उपभोक्ता आयोग ने दिए थे। इसके लिए बार-बार तारीख लगाई गई, लेकिन निगम का कोई भी अधिकारी अपना पक्ष रखने के लिए नहीं पहुंचा था। जिसके चलते आयोग ने उपभोक्ता की समस्या सुनकर और पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर फैसला सुनाया था।
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