अक्षय तृतीया पर बाजारों में उमड़े खरीदार, 90 करोड़ का हुआ कारोबार
बुलंदशहर। अक्षय तृतीया के दिन मंगलवार को शहर के सराफा बाजार खरीदारों से गुलजार रहे। खासकर आभूषण और कपड़ा व्यवसाय में काफी तेजी रही। वहीं, सोने व चांदी के जेवर खरीदने को लेकर महिलाएं काफी उत्साहित दिखीं। ज्यादातर लोगों ने सोने, चांदी के बने गहने, बर्तन और सिक्के खरीदे। कोरोना संक्रमण के बीच दो साल बाद सराफा का करीब 90 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है। वहीं, दूसरी ओर शादी-विवाह भी शुरू हो गए और जिले में शहनाई बजने लगी है।
अक्षय तृतीया पर शहर के सराफा बाजार, चौक बाजार, डीएम रोड, कृष्णा नगर समेत अन्य क्षेत्रों में स्थित ज्वेलरी की दुकानों में खरीदारों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। शादी-विवाह को देखते हुए भी महिलाओं ने अग्रिम खरीदारी की। वहीं, मई माह में होने वाले लगन की खरीदारी महिलाओं ने अक्षय तृतीया के दिन ही कर ली। साथ ही हर उम्र की महिलाओं व लड़कियों ने ज्वेलरी की दुकानों पर पहुंचकर मनपसंद गहनों की खरीदारी की। चौक बाजार में ज्वेलरी की दुकान चलाने वाले हेमंत वर्मा ने बताया कि दो साल बाद कोरोना संक्रमण से बाजार प्रभावित नहीं हुआ। इससे बाजारों में ग्राहकों की चहल-पहल दिखाई दी। वहीं, अच्छा कारोबार होने से सराफा कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक नजर आई।
शुभ माना जाता है सोना खरीदना
अक्षय तृतीया के दिन लोग गहने-जेवरात, गाड़ी, मकान, इलेक्ट्रॉनिक आइटम आदि की खरीदारी करते हैं, जिसमें सोने की खरीदारी काफी शुभ मानी जाती है। पंडित राज शर्मा ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसी को देखते हुए महिलाओं में खरीदारी को लेकर खासा उत्साह बना रहता है। अक्षय तृतीया के दिन धन की देवी लक्ष्मी एवं कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। पंडित करुणानिधि भारद्वाज ने बताया कि इसी दिन कुबेर ने देवी लक्ष्मी से धन की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की थी, जिसके बाद देवी लक्ष्मी ने उन्हें धन-वैभव व सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया था।
दान आदि करने से मिलता है फल
पंडित गिरिश चंद शर्मा ने बताया कि हिंदू पर्व अक्षय तृतीया को एक पावन पर्व माना जाता है। इस मौके पर लोग घर में नए सामान या सोने-चांदी के आभूषण खरीदते हैं। बैशाख माह में शुल्क पक्ष की तृतीया को मनाया अक्षय तृतीया कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया पर्व के दिन स्नान, होम, जप, दान आदि का अनंत फल मिलता है। इसलिए भारतीय संस्कृति में इसका बड़ा महत्व है। माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन पीतांबर, नर-नारायण और परशुराम के अवतार हुए। इसलिए इस दिन इनकी जयंती भी मनाई जाती है। गिरिश्रा चंद शर्मा ने बताया कि अक्षय तृतीया के साथ ही शादी-विवाह शुरू हो गए हैं और जिले में शहनाई बजने लगी है। इसके चलते शादी वाले घरों में तैयारी भी जोरों पर शुरू हो गई हैं। घराती और बाराती भी अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। अब लगातार जून तक शादी-विवाह का मुहूर्त रहेगा।