मोदीनगर। कृषि भूमि कब्जा मुक्त कराने की मांग को लेकर तहसील मुख्यालय पर धरना दे रहे किसान ने शुक्रवार को उपजिलाधिकारी कार्यालय में अधिकारियों के सामने शरीर पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का प्रयास किया। कार्यालय में मौजूद तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने तुरंत किसान के हाथ से लाइटर छीन लिया। घटना से वहां अफरा-तफरी मच गई। किसान का आरोप है कि धरना खत्म करने के लिए हड़काने से क्षुब्ध होकर उसने यह कदम उठाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
निवाड़ी के गांव पैंगा निवासी किसान सतेंद्र पंवार बीते तीन दिन से तहसील मुख्यालय के अधिकारी गलियारे में एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। सतेंद्र का आरोप है कि उनकी 700 गज जमीन पर भूमाफिया ने फर्जी बैनामा कर अवैध कब्जा कर लिया। उन्होंने 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस की चार्जशीट में 7 को आरोपी बनाया गया।
सतेंद्र ने बताया कि तहसीलदार कोर्ट में उन्होंने मुकदमा जीत लिया था, लेकिन एक माह बाद ही तीन फैसले पलट दिए गए। एसडीएम से लेकर सीएम तक गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। जमीन कब्जा मुक्त कराने की मांग को लेकर वह अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
सतेंद्र के मुताबिक शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे अधिकारियों ने वार्ता के बहाने एसडीएम अजीत सिंह के कार्यालय में बुलाया। वहां एसडीएम, तहसीलदार समेत कई अधिकारी व अन्य लोग मौजूद थे। आरोप है कि सभी ने धरना देने पर हड़काया और खत्म करने का दबाव बनाया। इससे क्षुब्ध होकर उन्होंने जेब से पेट्रोल की बोतल निकालकर शरीर पर उड़ेल ली और लाइटर निकाल लिया। तभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने लाइटर छीन लिया। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का भरोसा देकर किसान को शांत कराया।
इस संबंध में एसडीएम अजीत सिंह का कहना है कि सतेंद्र पंवार के छह वाद दायर थे, जिनमें चार का फैसला उनके पक्ष में व दो का उनके भाई के पक्ष में आया। वह मनमाने फैसले का दबाव बना रहे हैं। फैसला पलटने और धरने के लिए हड़काने का आरोप निराधार है।