संतान की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत
बुलंदशहर। बच्चों की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के लिए बृहस्पतिवार को माताओं ने अहोई माता का व्रत रखा। दोपहर को महिलाओं ने बुजुर्ग महिलाओं से अहोई माता की कथा सुनी और बच्चों के सुखी जीवन की कामना की। शाम के समय महिलाओं ने तारों/चांद को अर्घ्य दिया और अपनी सास आदि का सम्मान कर व्रत खोला। वहीं, पुष्य नक्षत्र के चलते बाजार में खरीदारों की भीड़ लगी रही।
आवास विकास, साठा, देवीपुरा, कैलाशपुरी, राधानगर, आनंद विहार, सुशीला विहार और हंस विहार समेत अन्य जगहों पर महिलाओं ने एक-दूसरे के घर पहुंचकर अहोई अष्टमी की कथा सुनकर व्रत के अन्य विधान पूरे किए। कुछ माताओं ने बच्चों को कपड़े और अन्य चीजें उपहार में दीं। ज्योतिषाचार्य पंडित राज शर्मा ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत विशेष रूप से संतान की आयु एवं आरोग्य के लिए रखा जाता है। इस व्रत को रखने से संतान का कल्याण होता है। इसलिए माताएं इस व्रत को विशेष रुप से रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। पहले तो केवल पुत्र संतानों के लिए ही व्रत को रखा जाता था लेकिन अब कन्याओं के लिए भी व्रत रखा जाने लगा है। व्रत के दौरान चांदी के मोतियों की माला भी बनाई जाती है। प्रत्येक वर्ष अहोई अष्टमी के दिन दो मोती माला में डाल दिए जाते हैं। वर्ष-वृद्धि के साथ माला के मोती भी बढ़ने लगते हैं।
पुष्य नक्षत्र में दिखा उत्साह
अहोई अष्टमी के दिन इस बार पुष्य नक्षत्र का विशेष योग बनने पर लोगों के बीच उत्साह नजर आया। दिवाली से पूर्व लोगों ने शुभ मुहूर्त में इलेक्ट्रानिक्स, दोपहिया वाहन, ज्वेलरी, चांदी के सिक्के समेत चार पहिया वाहन की खरीदारी की। व्यापारियों के मुताबिक मुहूर्त में दिनभर करीब पांच करोड़ रुपये की खरीदारी हुई। वहीं, अधिकांश दुकानदारों ने डिस्काउंट ऑफर भी दे रखे हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह नक्षत्र न सिर्फ समृद्धि देता है बल्कि संपत्ति और आय में भी वृद्धि करता है। इसलिए बाजारों में दिनभर उत्साह भरा माहौल रहा।