किसानों की लड़ाई के आगे झुकी सरकार
बुलंदशहर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा के बाद किसान संगठनों में खुशी का माहौल है। कहीं किसानों ने आतिशबाजी करते हुए जश्न मनाया तो कहीं पर एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। वहीं विपक्षी दलों के नेता इसे चुनावी स्टंट बताते हुए किसानों से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद भाकियू अराजनैतिक के एनसीआर उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मांगेराम त्यागी के नेतृत्व में किसानों ने काला आम चौराहे पर खुशी मनाते हुए आतिशबाजी की। उन्होंने कानून वापसी के कदम की सराहना करते हुए कहा कि असली कानून वापसी तब मानी जाएगी जब संसद में कानून वापसी के प्रस्ताव को पास किया जाएगा। इस दौरान रालोद नेता सुनील चरौरा ने भी इसे किसानों की जीत बताया। इसके अलावा गुलावठी में भाकियू अंबावता, शिकारपुर, अनूपशहर, डिबाई, औरंगाबाद, स्याना, नरौरा में किसानों ने जश्न मनाया। इस दौरान पूर्व विधायक मुकेश पंडित ने सरकार के इस कदम को किसानों के साथ छलावा बताया। चुनाव के लिए गांवों में जाकर वोट मांग सकें, इसके लिए कानून वापसी का लालच किसानों को दिया गया है। किसान इस ठगी में आने वाले नहीं हैं। पूर्व मंत्री किरनपाल सिंह ने इस फैसले को देर से उठाया गया सही कदम बताया। उन्होंने किसानों से अपील की कि अब धरना खत्म करके अपनी खेतीबाड़ी की ओर ध्यान दें। युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष जियाउर्रहमान एडवोकेट ने कहा कि काले कानून वापस लेने के लिए किसानों और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का संघर्ष रंग लाया है। राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह लोधी ने भी सरकार के कदम का स्वागत किया।
बोले किसान नेता और जिलाध्यक्ष
चुनाव में हार के डर से लिया फैसला
चुनाव के समय में अपनी हार को देखते हुए सरकार ने कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया है। किसानों को सरकार के इस झांसे में आने की जरूरत नहीं है। चुनाव के बाद सरकार फिर से कृषि कानून लागू करने के लिए प्रयास कर सकती है।
- राहुल यादव, जिलाध्यक्ष सपा
राज्यों के चुनाव परिणाम से घबराई है सरकार
कई राज्यों में चुनावों के परिणाम में भाजपा की स्थिति खराब हुई। इससे भाजपा के नेता कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर हुए हैं। यदि सरकार किसानों के हित में सोचती तो कानून वापस लेने में इतना समय नहीं लगता।
- एड. राजेंद्र कुमार, जिलाध्यक्ष, बसपा
किसानों के डर से सरकार ने लिया निर्णय
किसानों के डर और चुनावों में हार के कारण सरकार ने यह घोषणा की है। अब यदि इसे पूरा अमलीजामा पहनाया जाता है तो किसानों की जीत होगी। प्रदर्शन के दौरान जो किसान शहीद हुए हैं, उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए। - श्यौपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
किसानों की लड़ाई के आगे झुकी सरकार
जब तक काले कानून पूरी तरह से वापस नहीं हो जाते हैं तब तक यह घोषणा पूरी नहीं है। कानून वापसी का कदम ऐतिहासिक है, क्योंकि किसानों की इस लड़ाई के आगे आखिर सरकार को झुकना पड़ा। इससे सरकार को किसानों की ताकत का अंदाजा लग गया।
- अरुण चौधरी, जिलाध्यक्ष रालोद
एमएसपी पर गारंटी का कानून बनाए सरकार
कृषि कानून वापसी से किसानों को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। किसान लंबे समय से एमएसपी पर गारंटी की मांग कर रहे हैं। यदि सरकार किसान हितैषी है तो एमएसपी पर गारंटी का कानून बना दे। यदि सरकार ऐसा करती है तो सभी किसान मिलकर सरकार की प्रशंसा करेंगे।
- धर्मेंद्र सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाकियू महाशक्ति
किसानों का संघर्ष रंग लाया
देश के सभी किसान सरकार के इस कदम की सराहना करते हैं। कृषि कानून वापसी के लिए किसानों का संघर्ष रंग लाया। अब सरकार को किसान आयोग का गठन करते हुए किसान हितैषी होने का सबूत देना चाहिए।
- अशोक शर्मा, मंडल प्रभारी, भाकियू भानु
किसान आयोग का गठन के मुद्दे पर हो बातचीत
जब तक संसद में तीनों कानून वापस नहीं होंगे तब तक धरना चालू रहेगा। संयुक्त किसान मोर्चा की इस जीत के लिए प्रत्येक कार्यकर्ता बधाई का पात्र है। किसानों के लिए एमएसपी और किसान आयोग का गठन के मुद्दे पर भी बातचीत होनी चाहिए।
- पवन तेवतिया, प्रदेश अध्यक्ष मजदूर प्रकोष्ठ, भाकियू अंबावता
किसान हितैषी होने का दिखावा कर रही सरकार
सरकार ने करीब एक वर्ष में कृषि कानून वापस लिए हैं, वह भी मजबूरीवश कदम उठाया गया है। यह किसान हितैषी होने का दिखावा भर है। चुनाव के बाद फिर से सरकार इन कानून को लागू करने की कोशिश कर सकती है।
- शैलेंद्र लोधी, जिलाध्यक्ष आप