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पुलिस की नाक के नीचे दफन था शव, सोती रही चौकी पुलिस

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नाक के नीचे दफन था शव, सोती रही चौकी पुलिस
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बुलंदशहर। सात दिन बाद अधिवक्ता का शव मखदूमगंज चौकी से बमुश्किल 70 मीटर की दूरी पर सात फीट गहरे गड्ढे में मिलने से सनसनी मच गई। पुलिस चौकी से चंद कदम की दूरी पर शव मिलना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा रहा है। सात दिन तक चौकी पुलिस सोती रही, लेकिन अपने आस पास घूम रहे आरोपी को पहचान नहीं सकी या फिर पहचानने की कोशिश ही नहीं की गई। ऐसे सवाल बहुत हैं, जिनका जवाब देने से पुलिस महकमा कतरा रहा है।
गौरतलब है कि अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह गत 25 जुलाई की देर शाम को लापता हुए थे। इस संबंध में उनके परिजनों ने देर रात करीब 11 बजे गुमशुदगी की तहरीर दी थी। जिसके बाद पुलिस ने उसी रात गुमशुदगी दर्ज की और जांच बाद में अपहरण में तरमीम हो गई। सात दिन तक पुलिस ने जनपद के अलावा गैरजनपदों, गैर राज्यों में भी अधिवक्ता की तलाश की। सात से आठ टीमें उनकी सकुशल बरामदगी के लिए लगी हुई थीं। लेकिन, उनका कहीं कोई सुराग नहीं लग पा रहा था। हालांकि, शुक्रवार देर रात जिस आरोपी व्यापारी के गोदाम से पुलिस ने शव बरामद किया। उक्त आरोपी व्यापारी पहले दिन से पुलिस व परिजनों के साथ अधिवक्ता की तलाश में जुटा हुआ था। अब सवाल उठता है कि पूरे प्रकरण में जब अधिकतर तथ्य पुलिस के पास थे तो शव बरामदगी में इतनी देर कैसे हो गई। साथ ही पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर हुई वारदात के बाद आरोपी सुकून से पुलिस के समक्ष अपनी लाइसेंसी पिस्टल लगाकर घूमता रहा। सूत्रों की मानें तो एक बार पुलिस ने उसे पूछताछ के बाद छोड़ भी दिया था। साथ ही चर्चा यह भी कि चौकी के पुलिसकर्मियों से आरोपी की अच्छी साठगांठ थी। जिसका वह फायदा उठा रहा था।
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इनसेट=
दिन में वारदात स्थल पर पहुंच लौट आई थी थाना पुलिस
शुक्रवार को दिन में ही परिजनों के दबाव बनाने पर सीओ समेत पुलिसकर्मी व परिजन आरोपी के गोदाम पर पहुंचे थे। आरोपी के परिसर में उसके करीब सात से आठ गोदाम बने हुए हैं। परिजनों व पुलिस ने एक एक गोदाम को चेक किया था। लेकिन, जिस गोदाम में शव मिला उसे चेक नहीं किया गया। बताया गया कि जब पुलिस उस गोदाम के निकट पहुंची और ताला खोलने के लिए नौकर से कहा तो उसने कहा कि यह उनका गोदाम नहीं है और न ही इसकी चाभी है। जिसके बाद पुलिस वहां से लौट आई थी। लेकिन, आठ घंटे बाद ही मौके से शव को बरामद कर लिया गया।
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