केंद्रीय जल संसाधन विकास मंत्री उमा भारती ने कहा कि नमामि गंगे मिशन के लिए कैबिनेट में मंजूरी मिल गई है। अब गंगा की सेहत पर युद्ध स्तर पर काम शुरू होगा।
अनूपशहर के लिए रिवर फ्रंट योजना के तहत एसटीपी और सीवर लाइन डालने पर 78 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री गढ़मुक्तेश्वर में सोमवार को नमामि गंगे मिशन का श्री गणेश करने के बाद मंगलवार को छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध अनूपशहर में लोगों को संबोधित कर रही थीं।
सेना के 100 जवान रखेंगे प्रदूषण पर नजर
उमा भारती ने कहा कि नमामि गंगे मिशन में सेना की मदद भी ली जा रही है। अनूपशहर में मेजर कीर्ति कुमार के निर्देशन में 100 जवान गंगा प्रदूषण पर नजर रखे हुए हैं।
कस्बे का गंदा पानी गंगा में नहीं जाने पाए इसलिए आरएसडी योजना लागू की जा रही है। श्मशान घाटों पर परंपरागत और विद्युत पद्धतियों से शवदाह की व्यवस्था होगी।
उन्होंने कहा कि गंगा में जीवन शक्ति की पहचान जलीय जीव जंतु की मौजूदगी से होती है। इनके नष्ट होने के कारणों की जांच होगी। केवट व पुरोहितों से जीव जंतुओं की सुरक्षा के बारे में जानकारी ली जा रही है।
साथ ही आधुनिक घाटों का निर्माण किया जायेगा। गंगा किनारे खुले में कोई शौच न जा पाए इसलिए गंगा से सटे गांवों में शौचालयों का निर्माण कराया जायेगा। महिलाओं के वस्त्र परिवर्तन कक्ष व प्रसाधन कक्ष बनेंगे।
एसटीपी सीवर लाइन पर खर्च होंगे 78 करोड़
अनूपशहर में नमामि गंगे योजना को लागू करने के लिए केंद्र स्तर पर अहार व सिरौरा गांव का मॉडल गंगा गांवों के रूप मे चयन किया गया है। गंगा गांवों में केंद्र सरकार की समस्त योजनाओं का क्रियान्वयन किया जायेगा।
बाद में देश के अन्य गंगा गांवों में इस मॉडल को लागू किया जाएगा। उमा भारती ने कहा कि अनूपशहर में आधुनिक तकनीकी पर आधारित एसटीपी बनाने व सीवर लाइन डालने के लिए केंद्र ने प्रदेश सरकार को 78 करोड़ रुपये अवमुक्त किए हैं।
पानी प्रदेश का विषय है, इसलिए प्रोजेक्ट की शुरूआत प्रदेश सरकार को करनी है। पहले 70 प्रतिशत केंद्र व 30 प्रतिशत प्रदेश सरकार को पैसा लगाना होता था। लेकिन दोनों जगहों पर अलग अलग सरकार होने से योजनाएं लटक जाती थीं।
लेकिन अब सौ प्रतिशत धन केंद्र सरकार देगी। नमामि गंगे के तहत बीस हजार करोड़ रुपये को स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश सरकार को सहयोग व जमीन देनी है।
उमा भारती ने कहा कि अनूपशहर निवासी नमामि गंगे प्रोजेक्ट में सलाहकार हैं इसलिये अनूपशहर के इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी आर्मी के जवानों की है।
उन्होंने बताया कि जवान वृक्षारोपण करेंगे। किन वृक्षों को गंगा किनारे लगाया जाना है इसका निर्णय वन विभाग करेगा। सेना के जवान देखेंगे कि कौन सी औद्योगिक इकाई गंगा को प्रदूषित कर रही है।
कौन कौन से नाले गंगा में आ रहे हैं, जवानों को देश के साथ साथ अब गंगा की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पचास करोड़ लोगों को रोजगार देती है गंगा
उमा भारती ने कहा कि पीएम मोदी ने नारा दिया है कि अब हम गंगा को मैला नहीं रहने देंगे, जिसका क्रियान्वयन जल संसाधन विकास मंत्रालय को करना है।
उन्होंने कहा कि मैं यह भी सुनिश्चित करूंगी की इस बीस हजार करोड़ रुपये के फंड का सदुपयोग हो। उन्होंने कहा कि गंगा पचास करोड़ लोगों को रोजगार देती है।
साल में सत्तर करोड़ लोग गंगा में स्नान करते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता है और यही लोग यदि तय कर लें कि पहली डुबकी में गंगा को ंगंदगी व प्रदूषण मुक्त करने का काम करेंगे।
तब दूसरी डुबकी मे स्नान करेंगे, तो गंगा गंदी हो ही नहीं सकती है। सब काम सरकार नहीं कर सकती आम आदमी को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी है।
उनके साथ संयुक्त सचिव अमिता प्रसाद, नमामि गंगे के तकनीक हेड डीएस ढपोला, केंद्रीय भूजल बोर्ड के चेयरमैन केबी विश्वास, डाल्फिन विशेषज्ञ डा.संदीप बेहरा, केंद्रीय व प्रदेश प्रदूषण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी तथा मिनिस्ट्री के लोग व वैज्ञानिक आये हुए थे।
अहार- सिरोरा गंगा गांव घोषित
अहार व सिरौरा गांव का मॉडल गंगा गांवों के रूप मे चयन किया गया है। गंगा गांवों मे केंद्र सरकार की समस्त योजनाओं का क्रियान्वयन होगा। बाद में देश के अन्य गंगा गांवों में इस मॉडल को लागू किया जाएगा।