बदायूं। कोरोना संक्रमण के खराब दौर के बाद आई दिवाली इस बार ज्यादा जगमग होगी। दिवाली पर सबसे ज्यादा पटाखे बच्चे ही चलाते हैं। पर पटाखे अभिभावक ही बच्चों को खरीदकर देते हैं। ऐसे में घर संभालने वाली महिलाओं ने दिवाली को खास तरीके से मनाने का मन बनाया है। उनकी ओर से बच्चों को इको फ्रेंडली पटाखे दिलाने के साथ ही ज्यादा से ज्यादा रोशनी करने पर जोर रहेगा।
- अधिकांश पटाखे अधिक धुआं छोड़ते हैं और उनके धमाके की आवाज भी बहुत तेज होती है। यह सरकारी मानक डेसिबल की तुलना में कहीं ज्यादा होती है। ऐसे में हम सबको इको फ्रेंडली पटाखे ही छोड़ने चाहिए - भाव्या, मीराजी चौकी
इस बार बच्चे को इको फ्रेंडली पटाखे छोड़ने पर जोर देंगे। उनकी खूबियां ये हैं कि उनसे धुआं नहीं निकलता बल्कि रंग बिरंगे कागजों की पतंगियां या थरमोकोल की रंग बिरंगी गोलियां फव्वारे के रूप में निकलती है। इससे प्रदूषण भी नहीं होता है। - मालती, जोगीपुरा
हम लोग अपनी खुशियों के चक्कर में पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। क्योंकि अधिकांश पटाखे आवाज के साथ धुआं भी करते हैं। साथ ही पटाखेे से चोट लगाने का भी डर बना रहा है। ऐसे में इक्रो फ्रेंडली दिवाली मनाई जाएगी। - प्रियंका, छह सड़का
दिवाली रोशनी का त्योहार है। सभी लोगों को अपने घर, आंगन में मिट्टी के बने दीये का उपयोग करना चाहिए। साथ ही इको फ्रेंडली पटाखों को ही यूज करें, ताकि पर्यावरण को किसी भी प्रकार नुकसान न पहुंचे। - अर्चना, शेखपट्टी