उझानी रेलवे स्टेशन से लोड होती गेहूं की रैक। संवाद
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उझानी (बदायूं)। विदेश में गेहूं की मांग बढ़ जाने से उत्पादकों का इस बार सरकारी क्रय केंद्रों से मोह भंग नजर आने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापार से जुड़े कांट्रेक्टरों ने महीने भर में यहां से गुजरात और आंध्रप्रदेश के लिए गेहूं की आठ रैक लोड कराकर भेज दी है। आढ़तियों के जरिये जिले भर से खरीदे गए गेहूं का थोक में मार्केट रेट 21 सौ रुपये प्रति क्विंटल पार चला गया, जबकि सरकारी रेट 2015 रुपये प्रति क्विंटल है। सीधे तौर पर इसका उत्पादकों को ही फायदा मिला है।
यहां रेलवे स्टेशन से गेहूं की रैक लोड होने का क्रम पिछले महीने शुरू हुआ। इससे पहले सरसों और बाजरा की रैक भी बाहर जा चुकी है। मंगलवार तड़के गुजरात के कांगड़ा पोर्ट के लिए एक और रैक रवाना हुई। इसे दिल्ली के कांट्रेक्टर के जरिये स्थानीय आढ़तियों ने लोड कराया। आढ़ती रतन जिंदल और अमित मित्तल के मुताबिक गेहूं की अधिकतर रैक गुजरात के कांगड़ा पोर्ट भेजी गई हैं। एक रैक में 26 हजार क्विंटल गेहूं लोड हो जाता है। सर्वाधिक पांच रैक बरेली के कांट्रेक्टर के जरिये यहां से लोड हुईं। आढ़तियों का कहना है कि यूक्रेन-रूस युद्ध लंबा चलने से गेहूं निर्यातक कुछ देश जरूरतमंद देशों के लिए अनाज की सप्लाई नहीं कर पाए। यूक्रेन में गेहूं का उत्पादन अच्छा खासा बताया गया है।
कांगड़ा पोर्ट के जरिये गेहूं अरब, अमन और चीन भेजा जा चुका है। विशाखापट्टनम पोर्ट से श्रीलंका भी गेहूं भेजा गया था। सबसे पहले बांग्लादेश के लिए रैक रवाना हुई थी। इसी वजह से थोक मार्केट में गेहूं का मूल्य 21 सौ रुपये प्रति क्विंटल से अधिक तक पहुंच गया। क्रय केंद्रों पर सरकारी रेट 2015 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे में उत्पादक सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने की बजाय सीधे तौर पर आढ़तियों के प्रतिष्ठानों पर पहुंच रहे हैं।
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उम्मीद के अनुरूप नहीं हुई पैदावार, महंगा होगा गेहूं
गेहूं उत्पादन में बदायूं जिला खास अहमियत रखता है। जिले में बिसौली, सहसवान, बिल्सी, उझानी, अलापुर, बिनावर समेत कई इलाके में मंडियों में गेहूं की आवक देखने को मिली है। जानकार बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले गेहूं की पैदावार इस साल 20 फीसदी तक कम रही। उत्पादन में गिरावट की मुख्य वजह कृषि वैज्ञानिक लेट बुआई मानते हैं, साथ ही गेहूं पकने से पहले ही तापमान में वृद्धि हो गई, जो नुकसानदायक साबित हुआ। रेट अच्छा मिलने से अधिकतर उत्पादकों ने शुरू में ही गेहूं बेचने की ओर कदम बढ़ा दिए। माना तो यह भी जा रहा है कि दो-तीन महीनों बाद गेहूं के रेट में इजाफा होगा। जरूरत पर गेहूं महंगा खरीदना पड़ेगा।