बदायूं। अगर आगे बढ़ने का हौसला है तो आर्थिक कमजोरी बाधा नहीं बनती। साधन जुट जाते हैं। सहयोगी मिल जाते हैं। सफलता के मुकाम तक पहुंचने के लिए आपकी लगन और मेहनत की कामयाबी का इतिहास लिखती है। यही कहानी है शहर के जालंधरी सराय पर रहने वाली मानसी चामुंडा की। वह भारोत्तोलन की दुनिया में अपना नाम चमका रहीं हैं। राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक कई पदक जीतने के बाद काॅमन वेल्थ गेम्स और फिर ओलंपिक तक पदक जीतने का लक्ष्य है।
आर्थिक संकट ने मानसी का रास्ता रोकने का प्रयास तो किया लेकिन कभी रोक नहीं पाए क्योंकि उसके हौसले को देखते हुए परिवार और समाज सहयोगी बनकर खड़ा हो गया। एक मौका ऐसा भी आया जब मानसी को तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेना था। नियम लागू किया गया कि जब प्रतिभागी 50 हजार रुपये का ड्राफ्ट जमा करेगा तब भाग सकेगा, तब मानसी सोच रहीं थींकि इतने रुपये कहां से आएंगे क्योंकि परिवार के पास इतना इंतजाम न था। फिर किसी परिचित ने मदद का हाथ बढ़ाया और मानसी ने प्रतियोगिता में भाग लिया। मानसी 24 घंटे में अपने भोजन पर 350-450 रुपये तक खर्च करती हैं। इसको लेकर परिवार के सदस्य अपने खर्चे में कटौती कर लेते हैं लेकिन मानसी के हौसले को देखते हुए उसकी डाइट में कोई कमी नहीं होने देते। इसलिए कहा जाता है कि जहां चाह है वहां राह है।
प्रोफाइल-
मानसी, उम्र 17 साल, बीएससी प्रथम वर्ष की विद्यार्थी
दस साल की उम्र से भारोत्तलन में भाग ले रहीं
-64 वां नेशनल स्कूल गेम 2018-19 गुवाहाटी
-66 वां नेशनल स्कूल गेम 2018-19 दिल्ली-प्रथम स्थान
-नेशनल वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2022-23 तमिलनाडुु
-खेलो इंडिया नेशनल वूमेन रैंकिंग वेटलिफ्टिंग टूर्नामेंट नवंबर 2022 मोदीनगर, तीसरा स्थान
-भारतीय भारोत्तोलन संघ की ओर से उज्बेकिस्तान के ताशकंद में जुलाई 2022 में खेली। वहां पर चौथा स्थान प्राप्त किया।
-भारतीय भारोत्तोलन संघ की ओर से मेक्सिको के लियोन में जून 2022 में खेला। वहां पर चौथा स्थान प्राप्त किया।
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पिता के दोस्त ने दी थी ट्रेनिंग
- मानसी चामुंडा को छोटे पर ही भारोत्तोलन
का अभ्यास उनके पिता के दोस्त राजीव कुमार कराते थे। क्योंकि वह भारोत्तोलन के कोच थी। छोटी सी उम्र से भारोत्तोलन का अभ्यास करने के लिए स्टेडियम जाने में मानसी को दिक्कत होती थी। उनके कोच घर से उसको साइकिल पर बैठाकर स्टेडियम ले जाया करते थे। वहां पर वह अपनी देखरेख में अभ्यास कराते थे और बाद में अपने साथ ही वापस लाते थे।
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मां चलाती है दुकान, पापा करते हैं खेती
-शहर के चुमांडा चौक निवासी मुनेंद्र नारायण मानसी चामुंडा के पिता है। साथ ही उनकी मां रजनी है। मानसी के पिता मुनेंद्र नारायण खेती बाड़ी का काम करते हैं। वहीं उनकी मां रजनी मिठाई की दुकान चलाती है। परिवार में दो बड़े भाई और एक बड़ी बहन है। एक बड़ा भाई चक्रेश चामुंडा भी उनके साथ में भारोत्तोलन का अभ्यास किया। हालांकि बाद में बड़े भाई बॉडी बिल्डिंग की तरफ वह बढ़ गए है।
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