राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन के तहत गांवों में स्वच्छ पेयजल की आस इस गर्मी में भी पूरी होती नहीं दिख रही। आठ हजार से ज्यादा आबादी वाले गांवों में पाइप लाइन के जरिए पेयजल सप्लाई को 2009-10 में मंजूरी मिली थी। करीब 26.15 करोड़ रुपये की लागत से जिले के 16 गांवों में नलकूप, पाइप लाइन और ओवरहेड टैंक निर्माण का काम हुआ। योजना का काम दिसंबर 2013 तक पूरा होना था। काम पूरा करने के बाद जल निगम ने योजना को ग्राम पंचायतों के हैंडओवर कर दिया। ग्राम पंचायतें पेयजल योजना का संचालन नहीं कर पा रही हैं।
करीब 26.15 करोड़ के राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन का काम जल निगम को सौंपा गया। इसकी देखरेख को ग्राम्य विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की थी। काम पूरा होने के बाद जल निगम ने नलकूप, पाइप लाइन और ओवरहेड टैंक को ग्राम पंचायतों के लिए हैंडओवर कर दिए। तमाम ग्राम पंचायतों ने अब तक नलकूपों पर ऑपरेटर नहीं रखे हैं। ऐसे में ओवरहेड टैंक-पाइप लाइन के जरिए इन गांवों में पेयजल सप्लाई नहीं हो पा रही है। करीब एक साल पहले योजना का काम पूरा होने के बाद भी इसमें शामिल गांवों में पाइप लाइन के जरिए पेयजल सपना बना हुआ है। ग्राम पंचायतों की उदासीनता से 26.15 करोड़ के पेयजल मिशन को पलीता लग गया है।
कहां खर्च हुआ कितना बजट
गांव का नाम बजट लाख रुपये में
डहरपुर 156.05 लाख
बगरैन 153.06 लाख
शेखूपुर 303.79 लाख
खंडुआ 176.06 लाख
सिरतौल 106.41 लाख
दहगवां 197.36 लाख
जगत 168.40 लाख
पुसगवां 125.51 लाख
पुठी सराय 117. 15 लाख
सतेती पट्टी 88.74 लाख
रमजानपुर 190.86 लाख
आरिफपुर 179.91 लाख
आसफपुर 142.98 लाख
खेड़ा बुजुर्ग 215.82 लाख
रसूलपुर 146.66 लाख
नगला शर्की 146.55 लाख
पिछले साल ही काम पूरा करके इसको ग्राम पंचायतों के हैंडओवर कर दिया गया था। इसका संचालन ग्राम पंचायतों को करना है। ग्राम पंचायतों के पास नलकूप ऑपरेटर और तकनीशियन नहीं हैं। इस वजह से योजना का संचालन नहीं हो पा रहा है। -आरके गुप्ता, अधिशासी अभियंता जल गिगम