पुलिस के सामने रो पड़ीं कुछ छात्राएं
पुलिस विद्यालय में पहुंची तो दो-तीन छात्राएं हकीकत बयां करते समय भावुक हो उठीं। उन्होंने रो-रोकर वार्डन की शिकायत की। बताया कि पिछले महीने खिड़की का शीशा टूट गया था। तब वार्डन ने दो घंटे तक उन्हें कक्षा में खड़ा रखा था। जबकि शीशा खिड़की पर बंदर के कूदने से टूटा था। इसके बाद प्रभारी निरीक्षक ने वार्डन से भी जानकारी की।
कस्तूरबा विद्यालय की वार्डन ने जिला कोआर्डिनेटर को छात्राओं और उनके अभिभावकों की ओर से हंगामा किए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद वह कोआर्डिनेटर के साथ विद्यालय पहुंचे तो ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया जो छात्राओं के उत्पीड़न का हो। पता लगा कि छात्राओं में ही आपस में विवाद हो गया था। -महेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए
किसी भी छात्रा को रात में विद्यालय से बाहर नहीं निकाला गया। बालिकाएं खुद ही कमरे से बाहर निकलीं और हंगामा करने लग गईं। उन्हें किसी ने भड़काने का काम किया है। सच्चाई से विभागीय अफसरों को भी अवगत करा दिया गया है। सुबह भी उनके परिवार ने बेवजह हंगामा किया। - ममता यादव, वार्डन, कस्तूरबा विद्यालय