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यूक्रेन से बदायूं के नौ छात्र-छात्राओं की वतन वापसी

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दिल्ली एयरपोर्ट पर माता-पिता के साथ ओसामा। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। यूक्रेन से बदायूं के नौ छात्र-छात्राओं की वापसी हो गई है। प्रतीक्षा मिश्रा, दानिश, ओसामा घर पहुंच गए हैं। तौहीद, इमरान मुंबई पहुंचने के बाद रविवार शाम छह बजे मुंबई से दिल्ली के लिए फ्लाइट से निकले। इधर, आनंद यादव की रविवार रात रोमानिया से दिल्ली के लिए फ्लाइट है। चार विद्यार्थी पहले ही यहां पहुंच चुके हैं।
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बिल्सी के मोहल्ला नंबर एक निवासी अवधेश मिश्रा की बेटी प्रतीक्षा मिश्रा यूक्रेन की इवानो मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की छात्रा हैं। यूक्रेन पर रूस का हमला होने के बाद वह 25 फरवरी को रोमानिया के लिए निकलीं थीं। रोमानिया बॉर्डर पर प्रवेश न मिलने के कारण वह अन्य छात्र-छात्राओं के साथ स्लोवाकिया पहुंचीं। कई दिन यहां शरण लेने के बाद शनिवार को उनकी फ्लाइट ने बिल्सी के लिए उड़ान भरी थी। रविवार को प्रतीक्षा घर पहुंच गईं।
इस्लामनगर के तौहीद और इमरान शनिवार रात हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट से मुंबई पहुंच गए थे। यह दोनों खारकीव मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस के छात्र हैं। रविवार शाम छह बजे दोनों ने मुंबई से दिल्ली के लिए उड़ान भर ली है। बुडापेस्ट से ही उड़ान भरने वाले आसामा दिल्ली पहुंचने के बाद घर आ गए हैं। बिसौली के सीकरी निवासी सादिक खां के बेटे दानिश खां की भी घर वापसी हो गई है। फ्लाइट से दिल्ली आने के बाद दानिश ट्रेन से बरेली पहुंचे। यहां परिवार वालों ने रेलवे स्टेशन पर उनका स्वागत किया। घर पहुंचने पर भी उनका स्वागत किया गया।
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इधर, शहर के डीएम रोड निवासी पशु चिकित्सा अधिकारी राघवेंद्र यादव के बेटे आनंद यादव ने भी दिल्ली के लिए रविवार देर शाम उड़ान भरी है। राघवेंद्र यादव ने बताया कि सोमवार तक बेटे के दिल्ली पहुंचने की संभावना है। इससे पहले सहसवान के शादाब, बगरैन के आकाश गुप्ता, शहर के कबूलपुरा की मुहिता, नाहर खां सराय के अयाज की घर वापसी हो चुकी है।
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प्रतीक्षा ने कहा-यूक्रेन के लोगों ने मदद की, रोमानिया बॉर्डर पर हुई दिक्कत
बदायूं। कई दिन तक यूक्रेन के पड़ोसी देश स्लोवाकिया में शरण लेने के बाद रविवार को बिल्सी के मोहल्ला नंबर एक की प्रतीक्षा मिश्रा की घर वापसी हो गई। उनके परिवार में खुशी का माहौल है। यूक्रेन पर रूसी हमलों के बाद इवानों से पहले रोमानिया बॉर्डर और फिर स्लोवाकिया तक का सफर पूरा करने के दौरान हुई दुश्वारियों के बारे में प्रतीक्षा ने यहां जानकारी दी।
प्रतीक्षा का कहना है कि वह यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में स्थित इवानों मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की छात्रा हैं। जब तक वह इवानो में थीं तब तक रूस ने इवानो पर हमले शुरू नहीं किए थे। यूक्रेन की राजधानी कीव और दूसरे बड़े शहर खारकीव पर हमले तेज थे। छात्र-छात्राएं डरे हुए थे। 25 फरवरी को वह इवानो से रोमानिया के लिए निकलीं। रोमानिया बॉर्डर पर हजारों लोगों की लाइन थी। भीड़ पर लाठी चार्ज भी किया गया। उनके पैर में भी लाठी लगने से गुम चोट है। इसके बाद वह साथी छात्र-छात्राओं के साथ वापसी लौटीं। यूक्रेन के लोग भारतीय छात्रों की मदद कर रहे हैं। रास्ते में कई जगह उनको स्थानीय लोगों ने मदद भी दी। खाने को दिया और रास्ता भी बताया। एक टैक्सी चालक ने उनसे किराया भी नहीं लिया।
प्रतीक्षा का कहना है कि शून्य से चार-पांच डिग्री कम तापमान में उनको 15 किमी पैदल भी चलना पड़ा। छात्र-छात्राएं डरे हुए थे। रोमानिया बॉर्डर पर हालात काफी खराब थे। स्लोवाकिया बॉर्डर काफी आसानी से पार हो गया। वहां पहुंचने के बाद भारतीय दूतावास ने संपर्क किया। शनिवार को सोते वक्त ही उनको दूतावास से कॉल करके बताया गया कि रात में उनकी फ्लाइट है। संवाद

इमरान और तौहीद ने मुंबई एयरपोर्ट से भेजी सेल्फी। संवाद- फोटो : BADAUN

 

घर पहुंचीं प्रतीक्षा अपने माता-पिता के साथ। संवाद- फोटो : BADAUN

 

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