उझानी (बदायूं)। हल्दी मिश्रित दूध पीने के बाद सिपाही और उसका पूरा परिवार बीमार हो गया। दूध शाम को ही उबाल कर कमंडल में रखा गया था। देर शाम सिपाही ने उसे पत्नी और बच्चों को पिलाने के बाद खुद भी पी लिया। कुछ देर बाद पहले बच्चों की हालत बिगड़ी फिर सिपाही और उसकी पत्नी को चक्कर आने लग गए। अनहोनी की आशंका से परेशान सिपाही ने बर्तनों में झांका तो कमंडल में मृत छिपकली पड़ी मिली। देर रात ही सिपाही ने पत्नी और बच्चों के लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। इलाज के बाद सभी की हालत ठीक है।
घटना कोतवाली के आवासीय परिसर की है। बिल्सी थाने में तैनात सिपाही उपेंद्र कुमार का परिवार कोतवाली के आवास में रहता। सिपाही उपेंद्र मंगलवार रात करीब आठ बजे कमरे पर पहुंचे। इससे पहले पत्नी मीरा ने दूध उबाल कर कमंडल में रख दिया था। खाना खाने के बाद सिपाही ने एक-एक गिलास दूध पहले बच्चों में अंश (12), कशिश (10) और रितिक (छह) को पिलाया फिर पत्नी मीरा को दिया। इसके बाद उपेंद्र ने दूध खुद पीया। इसके बाद तीनों बच्चों को जी मचलने लगा। सिपाही उपेंद्र कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बच्चों को उल्टियां होने लगी। इसी दौरान सिपाही और उनकी पत्नी मीरा को भी चक्कर आने लगे। इसके बाद सिपाही उपेंद्र ने पत्नी समेत बच्चों को कार से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जानकारी पर सीओ बिल्सी और पुलिस कर्मी अस्पताल पहुंच गए। सीओ ने डॉक्टरों से भी जानकारी की। करीब पांच घंटे तक चले इलाज के बाद सिपाही और उसके परिवार के सदस्यों की हालत में सुधार आया। बुधवार तड़के करीब छह बजे सभी को जिला अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। इसे लेकर कोतवाली परिसर में भी हड़कंप मचा रहा। सिपाही उपेंद्र की मानें तो पत्नी ने भगौना में दूध उबाला था। उसने दूध में जिस समय हल्दी घोली तब छिपकली नजर नहीं आई थी।
तो फिर कमंडल में पहले ही गिर गई थी छिपकली
उझानी। कमंडल में छिपकली किस समय गिरी, यह तो सिपाही की पत्नी को भी नहीं पता। लेकिन बताते हैं कि मीरा ने दूध को कमंडल में उड़ेलने से पहले उसे साफ किया था। कमंडल में दूध रखने के बाद उस पर ढक्कन नहीं लगाया गया था। ताकि दूध ठंडा हो जाए। यही चूक कमंडल में छिपकली के गिर जाने की वजह बन गई।