मोहल्ला शिवपुरम में संस्कार भारती की काव्य गोष्ठी में पाठ करते कवि। स्रोत: स्वयं
बदायूं। संस्कार भारती के मुख्य कार्यालय शिवपुरम में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ. अरविंद धवल ने की। काव्य संध्या का शुभारंभ षटवदन शंखधार ने सरस्वती वंदना से की। सभी रचनाकारों ने मां वीणापाणि के समक्ष पुष्प अर्पित किए।
डाॅ. गीतम सिंह ने पढ़ा, एकल है परिवार न कोई बहन दूसरा भाई है, मेरे घर में हुआ न कोई चाचा मौसी ताई है, दादी दादा वृद्ध आश्रम में। क्या करूं बतला दो, गूगल बाबा आप हमारा बसल वापस ला दो। डॉ. अरविंद धवल ने पढ़ा सजन है दूर सखियों संग मनाया जा रहा सावन, कभी मन मायके में है सजन के संग कभी है मन, सखी मेरी हथेली पर पिया के नाम की मेहंदी, जरा ऐसी सजाओ तुम हथेली चूम ले साजन। पवन शंखधार ने लोकगीत पढ़ा प्रदूषण के दुष्परिणाम को समझो और समझाओ, भैया पर्यावरण बचाओ, मिलकर पर्यावरण बचाओ। विनोद सूर्यवंशी ने शेर पढ़ा- ठोकरें खाके वह संभालते हैं, जो भी मंजिल तलाश करते हैं। समर बदायूंनी ने शेर पढ़ा मुझ पर जब इल्जाम लगाया जाता है, तब रस्सी का सांप बनाया जाता है। षटवदन शंखधार ने पढ़ा वीर जवानों की गाथा कभी न भूली जाएगी, मातृभूमि की चरण धूल में उसकी खुशबू आएगी। काव्य गोष्ठी का संचालन कवि पवन शंखधार ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संस्कार भारती के प्रांतीय सदस्य डाॅ. गीतम सिंह, काशीनाथ वर्मा, पीयूष वर्मा, अनिल सिंह, धनंजय मिश्रा, आकाश उपाध्याय, रमेश चंद्र शर्मा, वीना मिश्रा, प्राची मिश्रा, ह्रदयेन्द्र शंखधार आदि उपस्थित रहे।