बदायूं। शेखूपुर चीनी मिल के एक और रिटायर्ड कर्मचारी की सोमवार को मौत हो गई। लालपुल जोशी मोहल्ला निवासी लालचंद्र कश्यप शेखूपुर मिल में फिटर के पद पर तैनात थे। तीन साल पहले वह सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन अब तक उनके फंड, ग्रेच्युटी समेत अन्य देयकों का भुगतान नहीं हो सका था। हृदय रोगी लालचंद्र ने इलाज के अभाव में सोमवार को दम तोड़ दिया। इसके बाद मिल प्रबंधन ने उनके परिवार को छह लाख का भुगतान किया।
शेखूपुर चीनी मिल के करीब 125 कर्मचारियों को सेवानिवृत्त हुए तीन से चार साल हो चुके हैं। काफी कर्मचारियों को मिल प्रबंधन ने अब तक फंड, ग्रेच्युटी, नकदीकरण आदि देयकों का भुगतान नहीं किया है। भुगतान की मांग को लेकर कर्मचारी पिछले 155 दिन से मालवीय आवास पर धरना दे रहे हैं। इनमें कई बुजुर्ग कर्मचारी हृदय रोग समेत गंभीर बीमारियों का शिकार हैं। आर्थिक तंगी के कारण वे इलाज भी नहीं करा पा रहे। तीन साल पहले सेवानिवृत्त हुए 64 वर्षीय लालचंद्र कश्यप भी भुगतान की मांग को लेकर धरने में शामिल हो रहे थे।
पिछले दिनों लालचंद्र कश्यप को धरना स्थल पर ही सीने में दर्द हुआ। इस पर उनकी सेहत को देखते हुए साथी कर्मचारियों ने उनको घर पर आराम करने की सलाह दी थी। लालचंद्र के बेटे मनोज ने बताया कि उनको सोमवार सुबह सांस लेने में दिक्कत और सीने में दर्द की शिकायत हुई। अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इससे पहले ही मौत हो गई। पिता की मौत की सूचना मिल प्रबंधन को दी तो छह लाख रुपये का भुगतान चेक से कर दिया।
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इलाज के अभाव में जा चुकी चार कर्मचारियों की जान, दो कर चुके खुदकुशी
सहकारी क्षेत्र की शेखूपुर चीनी मिल के चार कर्मचारियों की आर्थिक तंगी के चलते इलाज के अभाव में जान जा चुकी है। दो कर्मचारी खुदकुशी भी कर चुके हैं, इसके बाद भी मिल प्रबंधन सबक नहीं ले रहा। अप्रैल 2011 में वेद प्रकाश गुप्ता विषाक्त पदार्थ खाकर खुदकुशी कर चुके हैं। जून 2015 में लक्ष्मण प्रसाद नाम के कर्मचारी की धरनास्थल पर हार्टअटैक से मौत हो गई थी। नौ मार्च 2016 को लैब केमिस्ट उमेश तिवारी ने मिल में खुद को गोली मारकर जान दे दी थी। उनकी बेटी की शादी 17 मार्च को थी और मिल से उनको भुगतान नहीं मिल रहा था। छह सितंबर 2021 को इस्लामिया इंटर कॉलेज के पास रहने वाले मिल के रिटायर्ड समयपाल धीर सिंह की इलाज के अभाव में हार्ट अटैक से जान चली गई। 23 नवंबर 2021 को नेकपुर गली नंबर एक में रहने वाले हेतराम की इलाज के अभाव में मौत हो गई। इन कर्मचारियों की मौत के बाद ही बकाया भुगतान हो सका था।
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सेवानिवृत्त हो चुके काफी कर्मचारियों का भुगतान हो चुका है। अब वही कर्मचारी बाकी हैं जिनकी फाइलों में गड़बड़ियां हैं। लालचंद्र कश्यप का भुगतान विशेष परिस्थितियों के आधार पर कर दिया गया है। अन्य कर्मचारियों का बकाया भुगतान प्रक्रिया में है। जल्द भुगतान कर दिया जाएगा।
-राजीव कुमार रस्तोगी, जीएम शेखूपुर चीनी मिल