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शेखूपुर सहकारी मिल की 1.60 लाख क्विंटल चीनी पर संकट

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शेखूपुर चीनी मिल। फाइल - फोटो : BADAUN
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बदायूं। सहकारी क्षेत्र की इकलौती शेखूपुर चीनी मिल की 1.60 लाख क्विंटल से ज्यादा चीनी पर संकट मंडराने लगा है। पहले से कई करोड़ के घाटे के चल रही मिल को चीनी की खराब गुणवत्ता के कारण अब और ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। चीनी की खराब गुणवत्ता के कारण यह हालात पैदा हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि चीनी मिल को हर माह करीब दस लाख रुपये गोदामों के किराये पर भी खर्च करना पड़ रहा है।
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सहकारी क्षेत्र की शेखूपुर चीनी मिल ने पिछले तीन साल से चीनी की बिक्री नहीं की है। दरअसल, खराब गुणवत्ता की चीनी की बाजार में मांग नहीं है। बड़ी कंपनियां भी यह चीनी नहीं खरीद रहीं। पिछले दिनों चीनी मिल से ग्वालियर की एक बिस्कुट कंपनी ने दो हजार बोरी चीनी का सौदा किया था। इससे पहले मिल से चीनी का सैंपल लिया गया। चीनी की गुणवत्ता खराब होने के कारण सैंपल फेल होने के कारण कंपनी ने खरीद रद्द कर दी। चीनी मिल को प्रति बोरा 3430 रुपये की दर से भुगतान मिलना था, लेकिन सौदा रद्द होने के कारण 68 लाख 60 हजार रुपये की चपत लगी। चीनी की गुणवत्ता बेहद खराब होने के कारण बाजार में भी यहां की चीनी की मांग नहीं है।
शेखूपुर मिल, चीनी का स्टॉक पीसीएफ के गोदामों में करती है। इसके बदले मिल को प्रति किलो छह रुपये के हिसाब से गोदाम किराया देना होता है। गोदामों में करीब 1.60 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक है। प्रति माह किराये के रूप में 9.60 लाख भुगतान करना पड़ रहा है। इसके साथ ही लंबे समय तक चीनी को स्टॉक में रखने के कारण उसका भाव भी गिर रहा है।
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गिर रही रिकवरी, गुणवत्ता में भी सुधार नहीं
शेखूपुर चीनी मिल में रिकवरी लगातार गिर रही है। इसके साथ ही चीनी की गुणवत्ता भी खराब हो रही है। दो वर्ष पहले तक यहां प्रति क्विंटल गन्ना पेराई पर रिकवरी करीब आठ किलोग्राम आती थी। चालू पेराई सत्र में रिकवरी गिर कर 7.2 किलोग्राम पर आ गई है। ऐसे में मिल को ज्यादा घाटा हो रहा है। दोयम दर्जे की चीनी की बाजार में मांग भी नहीं है। इतना ही नहीं मिल को हर महीने लाखों रुपये का ब्याज भी देना पड़ रहा है। मिल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि आने वाले दिनों में मिल को चलाना मुश्किल होगा।
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चीनी मिल की मशीनें काफी पुरानी हैं, इस कारण रिकवरी और क्वालिटी दोनों पर असर पड़ रहा है। तीन साल से चीनी की बिक्री नहीं हुई है। प्रति किलो छह रुपये की दर से गोदाम किराया देना होता है। पूरे प्रदेश की सहकारी मिलों की यही स्थिति है। देश में मांग से ज्यादा चीनी का उत्पादन है। ऐसे में सरकार अब चीनी के स्थान पर एथेनॉल उत्पादन पर जोर दे रही है।
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-राजीव कुमार रस्तोगी, जीएम शेखूपुर चीनी मिल
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