बदायूं। माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में बदलाव की तैयारी है। अब विद्यार्थियों का आकलन केवल शिक्षक की ओर से ली जाने वाली परीक्षा के आधार पर नहीं होगा। नई व्यवस्था में विद्यार्थी अपनी पढ़ाई और विषय की समझ को खुद भी परखेंगे। इसके बाद सहपाठी विद्यार्थी एक-दूसरे का आंकलन करेंगे। इससे विद्यार्थियों को यह जानने का अवसर मिलेगा कि उन्होंने कितना पढ़ा है और विषय को कितनी अच्छी तरह समझा है।
नई व्यवस्था में स्व-मूल्यांकन और सहपाठी मूल्यांकन को पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाएगा। शिक्षक विद्यार्थियों को निर्धारित विषय या पाठ के आधार पर प्रश्न और गतिविधियां देंगे। विद्यार्थी पहले स्वयं यह जांचेंगे कि उन्हें संबंधित पाठ की कितनी जानकारी है। इसके बाद वे अपने सहपाठी की समझ और तैयारी का भी आकलन करेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में अंक हासिल करने तक सीमित रखने के बजाय उनकी सीखने की क्षमता को बढ़ाना है। खुद का आकलन करने से विद्यार्थी अपनी कमजोरियों को पहचान सकेंगे। वहीं, सहपाठी का मूल्यांकन करने से उन्हें विषय को दूसरे नजरिए से समझने और अपनी जानकारी को जांचने का मौका मिलेगा। हालांकि, इस प्रक्रिया में शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
डीआईओएस लालजी यादव का कहना है कि विद्यार्थी स्वयं सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें। इससे परीक्षा का दबाव कम करने और पढ़ाई को अधिक रुचिकर बनाने में भी मदद मिलेगी। संवाद