बदायूं। ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर यहां कुछ ही बैंकों में कामकाज प्रभावित हुआ। जहां कर्मचारी हड़ताल पर रहे वहां ग्राहकों को दिक्कत झेलनी पड़ी। कुछ जगह बैंक संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन भी किया।
आल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन के आह्वान पर पीएनबी स्टाफ एसोसिएशन व उप्र बैंक इम्पलाइज यूनियन के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार की कामगार विरोधी नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया तो वहीं अन्य कर्मचारी सोमवार को सामान्य दिनों की तरह बैंकों में काम करने पहुंचे। जहां हड़ताल का असर रहा वहां ग्राहकों को लौटना पड़ा।
इधर पीएनबी स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा कि केंद्र सरकार कर्मचारियों की मांगों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। यही वजह है कि सरकारी कर्मचारियों के बुढ़ापे की लाठी पेंशन योजना को बंद कर दिया गया है, और उसकी जगह नई पेंशन योजना (एनपीएस) को लागू किया है जो कर्मचारियों के हित में नहीं है। सहायक महामंत्री औतपाल सिंह ने कहा कि बैंकों के निजीकरण को बंद किया जाए। सभी अनुबंधित कर्मचारियों व बीसी को नियमित किया जाए। उन्होंने बताया कि इस हड़ताल में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन, अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ समेत अन्य घटक शामिल नहीं हुए हैं।
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हड़ताल के कारण परेशान रहे ग्राहक
बैंक में पैसे निकलवाने के लिए पहुंचे तो पता चला कि हड़ताल है, कर्मचारी गेट पर प्रदर्शन कर रहे थे। जबकि पैसों की ज्यादा जरूरत थी पर हड़ताल की वजह से लौटना पड़ा।
-अब्दुल रहमान
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इस बार तो पता भी नहीं चला कि बैंकों में हड़ताल है। इसकी वजह से काफी परेशानी हुई है। कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण बैंक से संबंधित अभिलेखों के काम नहीं हो सके।
- निर्भय सिंह
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बैंक में जिस कर्मचारी से काम था, वह हड़ताल पर था। ऐसे में उस सीट से संबंधित काम नहीं हो सका। जबकि सोमवार की तिथि निर्धारित थी। अब देखते हैं क्या होता है।
-प्रदीप
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शनिवार को देर हो गई थी, ऐसे में बैंक में धनराशि की निकासी नहीं हो सकी। जैसे तैसे सोमवार को खाते से धनराशि निकालने के लिए पहुंचे तो हड़ताल की वजह से काफी परेशानी हुई।
-राम कुमारी
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केवल एक कर्मचारी संगठन ने हड़ताल का राष्ट्रीय आह्वान किया है। बाकी सभी संगठन के अधिकारी व कर्मचारी काम कर रहे हैं। इस वजह से सोमवार को बैंकों के कामकाज में कोई खास दिक्कत नहीं आई। कुछ बैंकों में कर्मचारियों की कमी रही पर बैंक खुले और नियमित कामकाज भी हुआ।
- श्याम पासवान, लीड बैंक मैनेजर