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Budaun News: शिवपाल गए लखनऊ, बेटे आदित्य ने संभाली चुनावी कमान

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बदायूं। सपा प्रत्याशी शिवपाल सिंह यादव की चुनावी कमान अब उनके बेटे आदित्य यादव ने संभाल ली है। तीन दिनों से आदित्य चुनावी जनसभाएं कर रहे हैं। शिवपाल सिंह यादव दो अप्रैल को लखनऊ चले गए। लखनऊ में उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात हो गई है। इसके बाद सियासी हलकों में कहा जा रहा है कि जल्द ही आदित्य को उम्मीदवार घोषित किया जा सकता है।
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धर्मेंद्र यादव 2009 में बदायूं आए और सांसद बने। दोबारा 2014 में लड़े फिर जीते। तीसरी बार 2019 में लड़े, मगर हार गए। चौथी बार के लिए धर्मेंद्र यादव ही तैयारी कर रहे थे और कार्यकर्ता भी चाहते थे, लेकिन सपा के कुछ नेताओं ने उनका विरोध कर दिया। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव को लिखकर दे दिया कि वे धर्मेंद्र यादव को चुनाव नहीं लड़ाना चाहते हैं, तब सपा मुखिया ने शिवपाल सिंह यादव के नाम का एलान किया।

एलान के 22 दिन बाद तक शिवपाल नहीं आए। वह अपने बेटे आदित्य को उम्मीदवार बनाना चाहते थे, लेकिन जब बेटे को लड़ाने के लिए उच्च स्तर पर फैसला नहीं हो सका तो वह खुद चुनाव मैदान में बेटे के साथ बदायूं आए। करीब सात दिन प्रचार किया। इसी दौरान सहसवान, बदायूं और गुन्नौर में सम्मेलन हुए, जिसमें आदित्य को लड़ाने की मांग मुखर होकर कार्यकर्ताओं ने उठाई।
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खुद शिवपाल सिंह यादव और सपा के लोकसभा क्षेत्र के चुनाव प्रचारी पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव और पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि वे राष्ट्रीय अध्यक्ष से कार्यकर्ता की भावनाओं के अनुरूप आदित्य यादव को चुनाव लड़ाए जाने का आग्रह करेंगे।



चुनाव प्रचार चल रहा है, लेकिन उम्मीदवार बदलने का विषय राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर का है। पार्टी जिसे उम्मीदवार बनाएगी हम उसे ही लड़ाएंगे।- आशीष यादव, सपा के जिलाध्यक्ष



सपा की गुंडई का जवाब देने को जनता तैयार : भूपेंद्र चौधरी

लखनऊ। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने बदायूं के सपा प्रत्याशी शिवपाल सिंह यादव के बयान पर कहा कि सपा का मूल चरित्र ही लोगों को धमकाना एवं अराजकता फैलाना है। शुक्रवार को एक्स पर जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव बदायूं में वोट न देने पर जनता से हिसाब-किताब बराबर करने की खुलेआम धमकी दे रहे हैं। वहीं कन्नौज में सपा मुखिया अखिलेश यादव के सामने ही भाजपा उम्मीदवार सुब्रत पाठक के टुकड़े-टुकड़े करने की बात कही गई और वे मौन रहे। उनका मौन रहना ही उनके समर्थन को दर्शाता है। खैर, उत्तर प्रदेश की देवतुल्य जनता-जर्नादन भी सपा की गुंडई का हिसाब-किताब बराबर करने के लिए तैयार बैठी है। लोकसभा चुनाव में जनता इन्हें जवाब जरूर देगी। बोले, ऐसा कोई पहली बार नहीं हो रहा है। इनकी हरकतों को जनता ने देखा और झेला है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हर जिले में इनका कम से कम एक उम्मीदवार अपराधी या इलाके का प्रसिद्ध गुंडा रहा है। चुनाव परिणाम आने से पहले ही सपा नेताओं ने पूरे प्रदेश में अराजकता फैलाई थी। ब्यूरो
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