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नौकरी के लिए लखनऊ तक चक्कर लगा रहे चयनित युवक

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बदायूं। पुलिस लाइन में आयोजित हुई एंबुलेंस कर्मचारियों की बंपर भर्ती में चयनित हुए युवा अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनका मानना है कि उनके साथ धोखा हुआ है। भर्ती के दौरान उनका टेस्ट लिया गया था। बाद में उन्हें प्रशिक्षण भी दिया गया लेकिन अभी तक उन्हें ज्वानिंग लेटर नहीं दिए गए हैं। इसके लिए युवा जिला कार्यालय से लेकर लखनऊ तक चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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एंबुलेंस कर्मचारियों की करीब दो माह पहले पुलिस लाइन ग्राउंड में बंपर भर्ती हुई थी। ये भर्ती तीन दिन चली थी। पहले दिन करीब आठ सौ युवा पुलिस लाइन पहुंचे थे। जिनमें मात्र सौ युवाओं का चयन हुआ था। जबकि अन्य युवाओं को वापस लौटा दिया गया था। इसके दूसरे दिन युवाओं की संख्या इतनी ज्यादा हो गई कि पुलिस लाइन में पुलिस को हालात संभालने पड़े थे। बताते हैं कि दूसरे पुलिस लाइन में करीब पांच हजार से ज्यादा युवक युवतियां पहुंचीं थीं। इससे पुलिस लाइन ग्राउंड में अव्यवस्था बिगड़ गई थी। युवक आपा खो बैठे थे और उन्होंने खूब हंगामा किया था। इससे एंबुलेंस कर्मचारियों और भर्ती करने वाली टीम को भागना पड़ा। हालांकि तीसरे दिन जब पुलिस ने मोर्चा संभाला तब कहीं भर्ती प्रक्रिया ठीक चली। सभी युवाओं को क्रमानुसार लाइन में बैठाया गया। ईएमटी के पद पर उनकी परीक्षा कराई गई। तो पायलट के पद पर टेस्ट ड्राइव करवाकर देखा गया। इस भर्ती में करीब पांच सौ युवक युवतियां चयन हुए थे। पायलट के पद पर चयन युवाओं को महिला अस्पताल बुलाया गया। उन्हें प्रशिक्षण भी दिया गया। तब से दो माह पूरे हो चुके हैं लेकिन चयनित युवाओं को रोजगार मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। युवाओं का मानना है कि कंपनी ने उनके साथ धोखा किया है। नौकरी देने के नाम पर उनकी मजाक बनाई गई है। इससे वह कंपनी कार्यालय चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
बस्ती जिले में हुआ था भर्ती घोटाला
-जिस समय बदायूं जिले में एंबुलेंस कर्मचारियों की भर्ती चल रही थी। उस समय मुरादाबाद समेत कई जिलों में भर्ती हुई। बताया जा रहा है कि बस्ती जिले में भर्ती घोटाला सामने आया था। इसको लेकर खूब विवाद हुआ।
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...तो बिगड़ जाएगी एंबुलेंस व्यवस्था
-एक ओर चयन किए गए युवाओं को ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिया जा रहा है। तो दूसरी कंपनी पुराने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही है। बदायूं जिले में ही गिने चुने कर्मचारी रह गए हैं। इससे एंबुलेंस व्यवस्था बिगड़ सकती है।
क्या कहते हैं आवेदक
- पुलिस लाइन ग्राउंड में एंबुलेंस कर्मचारियों की भर्ती हो रही है। इसका हमें दूसरे पता चला था। हम पुलिस लाइन ग्राउंड पहुंचे थे। अपना आवेदन भी जमा कर लिया लेकिन हमें यही नहीं बताया गया कि हमारा चयन हुआ है या नहीं।- बिजेंद्र, प्रतिभागी
- भर्ती के दौरान हमसे एंबुलेंस चलवाकर देखी गई थी। हमें बताया गया कि तुम टेस्ट में पास हो गए हो। उधर आवेदन जमा कर दो। उसके बाद हम घर लौट गए लेकिन ये पता नहीं कि आगे क्या हुआ।बदायूं कार्यालय वाले भी कुछ नहीं बता रहे हैं। -मिथुन पटेल, प्रतिभागी
-हमारा केवल आवेदन जमा कर लिया गया था। हमसे बोला गया कि आप जाकर उधर बैठ जाओ। हम अपनी बारी का इंतजार करते रहे और भर्ती प्रक्रिया समाप्त कर दी गई। वहां हम अकेले नहीं थे और भी युवा थे। इस तरह हमारे साथ हुआ है। -मनोज प्रतिभागी
-हम तीसरे दिन पहुंचे थे। सब शांति से भर्ती प्रक्रिया चली। लाइन में लगकर आवेदन जमा किया। टेस्ट भी कराया गया। हमने ठीक से एंबुलेंस चलाई थी। फिर भी हमारा कहीं नाम नहीं है। ये हमारे साथ धोखा नहीं तो क्या है।- अनूप पटेल, प्रतिभागी
- भर्ती के दौरान आवेदन जमा करा लिए गए थे। जैसे-जैसे जरूरत पड़ रही है। वैसे युवाओं को बुलाया जा रहा है। उन्हें ज्वानिंग लेटर दिया जा रहा है। - नरेश कुमार, ऑपरेशन हेड, 108 व 102 एंबुलेंस
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