बदायूं। मुख्यमंत्री के गड्ढामुक्त सड़कों के वादे और अभियान के बाद विधानसभा चुनाव के दौरान गड्ढों को लेकर काफी सियासत हुई। सत्ता पक्ष इसको लेकर विपक्ष के निशाने पर रहा तो जनप्रतिनिधियों ने भी दावे करने में कसर नहीं छोड़ी लेकिन इस बीच मंडी समिति रोड का हाल वही रहा जो कई साल पहले था। इस सड़क को जख्म पर जख्म मिलते गए और अब यह सड़क लोगों के लिए ‘नासूर’ बन चुकी है। मुरादाबाद- फर्रुखाबाद हाईवे का यह हिस्सा कभी बजट तो कभी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण आज तक सही नहीं हो सका।
बदायूं से उसावां जाने वाला मार्ग मुरादाबाद- फर्रुखाबाद हाईवे का हिस्सा है। इस हाईवे पर शहर में मंडी समिति के पास करीब एक-डेढ़ किलोमीटर का हिस्सा जर्जर हालत में आ चुका है। इसको बनवाने की मांग काफी समय से होती आ रही है, लेकिन अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधियों तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। मुख्यमंत्री के गड्ढा मुक्त सड़कों के दावे को भी अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि, जब विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हुई तो लोगों ने सत्ता पक्ष के नेताओं का विरोध करना शुरू कर दिया। मौके की नजाकत को देखते हुए नेताओं से लेकर अधिकारियों ने टूटी सड़क को बनाने के लिए कागजी कार्रवाई करना शुरू कर दी। बजट पास करने से लेकर टेंडर प्रक्रिया के लिए काम शुरू कर दिया गया।
जिस तेजी से काम हुआ, उससे लोगों को लगा कि यह सड़क जल्द ही बन जाएगी, लेकिन इसी बीच विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई तो ऐसे में काम बीच में रुक गया। तब से रुका काम आज तक शुरू नहीं हो पाया है और आज भी लोग समस्या से जूझ रहे हैं।
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पहले नहीं मिला बजट, अब कार्ययोजना में होगा शामिल
शहर से उसावां को जाने वाले रोड के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए पिछले साल 99 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। प्रस्ताव पास हो गया था, लेकिन शासन स्तर से बजट का आवंटन नहीं हो सका। चुनाव होने के बाद में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बजट पास करने के लिए शासन स्तर पर बात की, तो वहां से इस सड़क निर्माण के लिए दोबारा से कार्ययोजना में शामिल करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद में विभागीय अधिकारियों ने इस सड़क को बनाने के लिए कार्ययोजना बनाकर भेजी है।
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कसा तंज, गड्ढामुक्त सड़क देने के लिए धन्यवाद
मंडी समिति के पास सड़क में हो रहे गहरे-गहरे गड्ढों से दुखी लोगों ने चुनाव के समय तंज कसने में भी कसर नहीं छोड़ी थी। उन्होंने हाईवे किनारे बैनर लगाया और उस पर मुख्यमंत्री से लेकर जनप्रतिनिधियों का आभार जताया। इसमें लिखा था कि ‘माननीयों का गड्ढा मुक्त सड़कें देने के लिए सभी नगर वासियों की ओर से तहेदिल से धन्यवाद’, लेकिन इसके बाद भी जनप्रतिनिधियों के कान पर जूं नहीं रेंगी।
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किसी ने नहीं सुनी
कई बार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से मिल चुके हैं। सड़क को बनवाने की मांग की थी, लेकिन आज तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इससे परेशानी लगातार बढ़ रही है।
-प्रमोद गुप्ता
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समस्या यथावत
अधिकारियों से कई बार आश्वासन मिल चुका है कि इस सड़क को जल्द ही बना दिया जाएगा, लेकिन महीने तो छोड़िए साल-दर साल समय व्यतीत हो रहा है, लेकिन समाधान आज तक नहीं हुआ।
-विकास जैन
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नहीं दिख रही दिक्कत
जिस हिसाब से यहां पर दिनभर धूल भरी आंधी चलती है, उसकी वजह से सांस की बीमारी होने लगी है, पर अधिकारियों को हम लोगों की परेशानी नहीं दिख रही है।
-अक्षय उपाध्याय
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अफसरों ने आंखें मूंदीं
लखनऊ आने-जाने के लिए अधिकतर अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस रोड का उपयोग करते हैं, लेकिन सही कराने के लिए आज तक किसी ने जहमत तक नहीं उठाई है।
-सत्यवीर बाबू
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बजट नहीं मिलने के कारण सड़क का निर्माण नहीं हो सका था। अब दोबारा से इस सड़क निर्माण को कार्ययोजना में शामिल करके भेजा है जिसके बाद बजट मिलने पर इसका निर्माण कराया जाएगा।
-अमर सिंह, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग
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शहर के गौरीशंकर मंदिर के पास में सड़क काफी टूटी हुई है। इसको बनवाने का प्रयास किया था। केवल बजट जारी होना बाकी रह गया था, लेकिन तब तक आचार संहिता लग गई। इस कारण काम नहीं हो सका। पिछले दिनों लोक निर्माण विभाग मंत्री से मुलाकात थी, उनसे इस सड़क को बनवाने की मांग की है। उम्मीद है कि जल्द ही इसका निर्माण हो जाएगा।
- महेश चंद्र गुप्ता, सदर विधायक