बदायूं। स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। जिले के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में व्यवस्थाएं लगातार बदहाल होती जा रही हैं। हालात यह हैं कि जिला महिला अस्पताल में बिना बिना पैथोलॉजिस्ट के ही मरीजों को जांच रिपोर्ट दी जा रही है। अस्पताल के अन्य कर्मचारी ही रिपोर्ट तैयार कर मरीजों के हाथ में थमा रहे हैं। जो सीधे तौर पर मरीजों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है।
जिला महिला अस्पताल में रोजाना गर्भवती महिलाओं समेत अन्य मरीजों की खून व अन्य जांचें की जा रही हैं। साथ ही मरीजों को जांच के बाद रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही हैं। सोमवार को भी 135 के करीब रिपोर्ट दी गईं। इन सभी पर पैथोलॉजिस्ट के बिना देखे उनके डिजिटल हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। गलत रिपोर्ट मिलने की स्थिति में मरीजों को गलत दवा या इलाज मिलने का खतरा भी बना रहता है।
इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले पर आंखें मूंदे हुए हैं। वहीं, अस्पताल में लगी लिफ्ट लंबे समय से बंद पड़ी है, जिससे बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को सीढ़ियों से वार्ड तक पहुंचना पड़ता है। कई बार मरीजों को स्ट्रेचर पर उठाकर ऊपर ले जाना पड़ता है, जिससे तीमारदारों को काफी दिक्कत होती है। संजरपुर निवासी रतनेश व सोहन लाल का कहना है कि अस्पताल में इलाज के लिए आने पर सबसे पहले जांच और सुविधाओं की कमी सामने आती है। लिफ्ट बंद होने और स्टाफ की कमी से इलाज में देरी हो रही है।
सही होने के बावजूद...सितंबर से बंद पड़ी है लिफ्ट
-जिला महिला अस्पताल में स्थित तीन मंजिला 100 शैय्या बिल्डिंग में दो लिफ्ट लगी हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार वह सितंबर 2025 से सही है, लेकिन उनको आज तक मरीजों के उपयोग के लिए नहीं खोला गया है। इसकी वजह से मजबूरी में प्रसूता, गर्भवती महिलाओं को सीढि़यां या फिर रेलिंग की सहायता से पकड़-पकड़ के कक्षों तक जाना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि लिफ्ट जाने के लिए ऑपरेटर नहीं होने की वजह से इनको बंद रखा गया है।
वर्जन
पैथोलॉजिस्ट के बारे में जानकारी नहीं है। लिफ्ट सही है, लेकिन ऑपरेटर नहीं है। इस वजह से वह सितंबर से बंद है।
-डॉ. शोभा अग्रवाल, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल में ब्लड सैंपल देने के लिए पहुंची मरीज। संवाद