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एक साल बाद भी सौर उर्जा से रोशन नहीं हो सके सरकारी भवन

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बदायूं। बिजली बचाने के उद्देश्य से शासन ने जिले के सरकारी कार्यालयों पर सौर पैनल लगाने की योजना शुरू की थी, ताकि उससे उत्पन्न होने वाली बिजली से कार्यालयों को रोशन किया जा सके। इसमें सरकारी विभागों को शामिल किया गया था, लेकिन एक साल बाद भी ये योजना परवान नहीं चढ़ सकी।
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शासन की मंशा है कि बिजली की ज्यादा से ज्यादा बचत की जाए। इसको लेकर उसकी तरफ से शहरों में एलईडी लाइटों को लगाया जा रहा है। वहीं इसी दिशा में उसने नेडा विभाग को सरकारी कार्यालय (जिन की छत बड़ी हो) पर सौर प्लांट लगाने की बात कही थी, ताकि सौर प्लांट के माध्यम से जो बिजली उत्पन्न हो, उसका उपयोग कार्यालयों में किया जा सके। अगर इन प्लांट से बिजली ज्यादा उत्पन्न होती है, तो उस बिजली को पावर कारपोरेशन को बेचा भी जा सकता है। इसको लेकर नेडा द्वारा विकास भवन, कलक्ट्रेट, सदर तहसील, राजकीय मेडिकल कॉलेज से प्रस्ताव मांगे गए थे। इसको लेकर पत्राचार भी किया। बाद में नेडा विभाग द्वारा इसको लेकर फाइल शासन को भेजी गई। लेकिन करीब एक साल हो गया, शासन से फाइल पर कोई निर्णय नहीं हो सका, जिसके कारण आज भी ये योजना अधर में लटकी हुई है।
-अगर शुरूआत में अधिकारी इस योजना को गंभीरता से लेते, तो अब तक सरकारी बिल्डिंग के साथ में प्राइवेट इमारतों पर भी सौर उर्जा के प्लांट लगे हुए दिखाई देते हैं। लेकिन उस वक्त स्थानीय अधिकारियों की अनेदखी की वजह से यह फाइल काफी देर से पहुंची थी, जिसके बाद फाइल वहीं पर दबकर रह गई।
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यहां से फाइल शासन के लिए भेजी गई थी। वहां पर अभी इस संबंध में कोई भी प्रतिक्रिया नहीं मिली है। जिसकी वजह से यह काम अभी अधर में ही लटका हुआ है।
- डीवी सिंह, जेई नेडा
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